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एआई से उत्पादकता में वृद्धि, पर कर्मचारियों में नौकरी जाने का डर; कंपनियों की नीति में कमजोरी
16/9/2026, 11:37:51 pm

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के तेजी से अपनाव ने कई भारतीय उद्योगों में उत्पादकता को नया धक्का दिया है। कंपनियों ने डेटा विश्लेषण, ग्राहक सेवा चैटबॉट और निर्माण लाइनों में रोबोटिक्स को लगाकर औसतन कार्य पूरा होने में लगने वाला समय लगभग बीस प्रतिशत तक कम कर दिया है। एक हालिया सर्वेक्षण, अमर उजाला द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रगति के बावजूद लगभग उनतीस प्रतिशत कर्मचारी अपनी नौकरी जाने के डर से चिंतित हैं। यह डर principalmente उन कार्यों से उत्पन्न होता है जिन्हें एआई आसानी से स्वचालित कर सकती है, जैसे डेटा एंट्री, नियमित रिपोर्टिंग और básicos निरीक्षण।
सर्वेक्षण में आगे पता चला कि इकत्तीस प्रतिशत कर्मी नई तकनीक को अपनाने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं। उनकी झिझक का मुख्य कारण नौकरी की अनिश्चितता ही नहीं, बल्कि पर्याप्त प्रशिक्षण की कमी और स्पष्ट दिशानिर्देशों का अभाव भी है। कई कर्मचारी बताते हैं कि उनके संगठन ने एआई टूल्स के प्रयोग पर वर्कशॉप या मार्गदर्शन नहीं दिया, जिससे वे नई प्रणालियों को प्रभावी ढंग से चलाने में असहज महसूस करते हैं।
विशेषज्ञों की राय है कि कंपनियों को तकनीकी अपनाव के साथ‑साथ मानव संसाधन नीति पर बराबर ध्यान देना चाहिए। प्रभावी कदमों में कर्मियों को अपस्किलिंग कार्यक्रम देना, उनकी मौजूदा भूमिकाओं का पुनः डिज़ाइन करना और पारदर्शी संचार सुनिश्चित करना शामिल है। जब संगठन स्पष्ट रूप से बताते हैं कि एआई मानव श्रम का पूरक है, न कि विकल्प, तो डर का स्तर कम हो जाता है और अपनाने की गति बढ़ती है।
कुछ प्रमुख कंपनियों ने पहले से ही कर्मचारियों को एआई उपकरणों के साथ काम करने के लिए महीनों तक चलने वाले प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किए हैं। इन प्रयासों से न केवल डर कम हुआ है, बल्कि आंतरिक प्रक्रियाओं में नवाचार भी देखने को मिला है। उदाहरण के लिए, एक बड़ी ई‑कॉमर्स फर्म ने अपने गोदाम में रोबोटिक्स लाया और साथ ही कर्मचारियों को डेटा विश्लेषण के कोर्स कराए, जिसके परिणामस्वरूप ऑर्डर प्रोसेसिंग समय पैंतीस प्रतिशत घट गया और कर्मचारी संतुष्टि स्कोर में सुधार आया।
निति निर्माताओं का भी मानना है कि सरकार को उद्योगों के लिए दिशानिर्देश तैयार करने चाहिए, ताकि एआई के प्रयोग में नैतिकता और सामाजिक प्रभाव पर ध्यान दिया जा सके। इस तरह के समग्र दृष्टिकोण से ही technologie का लाभ सभी तक पहुँच सकता है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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