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जंतर-मंतर पर AI सर्विलांस: निजता और कानून पर सवाल

19/8/2026, 11:23:54 am
जंतर-मंतर पर AI सर्विलांस: निजता और कानून पर सवाल
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ताज़ा प्रदर्शन में पुलिस ने पहली बार बड़े पैमाने पर AI सर्विलांस और चेहरा पहचान प्रणाली तैनात की। कैमरे लगे ड्रोन और स्थिर CCTV नेटवर्क से लाइव फीड लेकर सॉफ्टवेयर ने प्रदर्शनकारियों के चेहरों को रियल‑टाइम में मिलान किया। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रणाली की सटीकता अभी भी विवादित है, खासकर कम रोशनी या भीड़ में। कई गैर‑सरकारी संगठनों ने दावा किया कि डेटा बिना सहमति के एकत्र किया गया और उसे कितने समय तक रखा जाएगा, इसकी कोई स्पष्ट नीति नहीं है। कानूनी जानकारों ने ध्यान दिलाया कि भारत में अभी तक चेहरा पहचान तकनीक के उपयोग के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों में निजता को मौलिक अधिकार माना गया है, लेकिन कार्यान्वयन के स्तर पर दिशा‑निर्देश अस्पष्ट हैं। दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि तकनीक केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए लगाई गई है और डेटा केवल जांच के दायरे में रखा जाएगा। हालांकि, पुलिस ने डेटा एक्सेस, रिटेंशन पीरियड और ऑडिट प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इस कदम को "बिना जवाबदेही के निगरानी" बताते हैं और मांग कर रहे हैं कि संसद एक स्पष्ट कानून बनाए, जिसमें पारदर्शिता, स्वतंत्र ऑडिट और नागरिकों के लिए शिकायत तंत्र शामिल हों। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना मजबूत नियामक ढांचे के AI सर्विलांस का विस्तार नागरिक स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है। जंतर-मंतर का यह मामला भविष्य में इसी तरह की तकनीकों के इस्तेमाल के लिए एक परीक्षण बन सकता है। सरकारी एजेंसियों ने अब तक किसी स्वतंत्र ऑडिट की घोषणा नहीं की है, जिससे पारदर्शिता की कमी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि ऐसी तकनीक का बेरोकटोक इस्तेमाल लोकतांत्रिक अधिकारों को खतरे में डाल सकता है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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