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AIADMK के साथ से कांग्रेस में बेचैनी, चिदंबरम ने कहा TVK को समर्थन की जरूरत नहीं, NEET पर केंद्र की घेराबंदी

14/5/2026, 3:56:55 am
AIADMK के साथ से कांग्रेस में बेचैनी, चिदंबरम ने कहा TVK को समर्थन की जरूरत नहीं, NEET पर केंद्र की घेराबंदी
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तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी, जो खुद को एक राष्ट्रीय दल के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है, अब AIADMK द्वारा तमिलनाडु वेलफेयर पार्टी (TVK) को समर्थन दिए जाने के बाद असहज महसूस कर रही है। यह स्थिति तब और जटिल हो गई जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि TVK को किसी बाहरी सहारे, खासकर AIADMK जैसे दल के समर्थन की कोई आवश्यकता नहीं है। उनके इस बयान ने कांग्रेस के भीतर की बेचैनी को और उजागर कर दिया है। चिदंबरम का बयान एक ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन और समीकरण लगातार बदल रहे हैं। तमिलनाडु वेलफेयर पार्टी, जिसका उल्लेख चिदंबरम ने किया, संभवतः स्थानीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहती है। AIADMK का उसे समर्थन देना कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से परेशानी का सबब बन गया है, क्योंकि इससे गठबंधन साझेदारियों में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। कांग्रेस शायद यह संदेश देना चाहती है कि वह अपने सहयोगियों के लिए ऐसे किसी भी बाहरी समर्थन को स्वीकार नहीं करेगी जो उसके अपने हितों के विरुद्ध हो या उसकी राजनीतिक स्थिति को कमजोर करे। इसी दौरान, पी. चिदंबरम ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा प्रणाली में धांधली और अनियमितताएं सामने आने के बाद छात्रों में गहरी निराशा और आक्रोश है। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इस गंभीर समस्या से निपटने में पूरी तरह विफल रही है और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस मामले की गहन जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि NEET जैसी एकल परीक्षा प्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है, क्योंकि यह देश के विभिन्न राज्यों के छात्रों को समान अवसर प्रदान करने में विफल साबित हो रही है। NEET का मुद्दा लंबे समय से तमिलनाडु में संवेदनशील रहा है। राज्य की कई राजनीतिक पार्टियां, जिनमें कांग्रेस भी शामिल है, NEET को सामाजिक न्याय और ग्रामीण छात्रों के लिए एक बाधा मानती रही हैं। चिदंबरम का यह बयान न केवल छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त करता है, बल्कि तमिलनाडु में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने का एक प्रयास भी है। यह कांग्रेस के लिए एक दोहरी रणनीति का हिस्सा लगता है: एक ओर, क्षेत्रीय दलों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना और दूसरी ओर, राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरकर अपनी विश्वसनीयता बढ़ाना। यह देखना दिलचस्प होगा कि AIADMK के समर्थन और NEET पर कांग्रेस के रुख का तमिलनाडु की आगामी राजनीति पर क्या असर पड़ता है। क्या कांग्रेस की यह चुनावी चाल सफल होगी, या फिर यह उसके लिए नई चुनौतियां लेकर आएगी? फिलहाल, चिदंबरम के बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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