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ए-380 की विदाई: सुपरजंबो का दौर खत्म, एयरलाइंस ने क्यों चुना छोटा विमान

14/9/2026, 1:31:50 am
ए-380 की विदाई: सुपरजंबो का दौर खत्म, एयरलाइंस ने क्यों चुना छोटा विमान
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एयरबस का ए-380 कभी आसमान का बादशाह माना जाता था। इसकी विशाल क्षमता और चार इंजन ने लंबी दूरी की उड़ानों को नई ऊंचाई दी। लेकिन अब बड़ी एयरलाइंस इसे धीरे-धीरे सेवा से हटा रही हैं। क्वांटास ने घोषणा की है कि 2026 तक उसके बेड़े से ए-380 पूरी तरह बाहर हो जाएगा। एमिरेट्स भी इसी समय सीमा में अपने सुपरजंबो को रिटायर करने की योजना बना रहा है। कारण साफ है: ईंधन की बढ़ती कीमत और रखरखाव का खर्च चार इंजन वाले विमान को महंगा बना देता है। दो इंजन वाले नए मॉडल जैसे ए-350 और बोइंग 787 कम ईंधन खपत में समान दूरी तय करते हैं। एयरबस ने कुल 251 ए-380 बनाए, लेकिन आखिरी डिलीवरी 2021 में हुई। उसके बाद कोई नया ऑर्डर नहीं मिला, जिससे उत्पादन लाइन बंद कर दी गई। एमिरेट्स अब अपने बेड़े में 118 ए-380 रखता है, लेकिन उसने 2025 तक 30 विमान बेचने का फैसला किया है। क्वांटास के पास 12 विमान हैं, जिन्हें वह चरणबद्ध तरीके से हटाएगा। यात्रियों की संख्या में भी बदलाव आया है। कोविड के बाद मांग छोटे हब‑टू‑हब रूट पर बढ़ी, जहां बड़े विमान भरना मुश्किल होता है। एयरलाइंस अब लचीले बेड़े को प्राथमिकता दे रही हैं। ए-380 की विदाई का मतलब यह नहीं कि इसकी तकनीक बेकार हो गई। इसके डिजाइन ने विंग टेक्नोलॉजी और केबिन कम्फर्ट में नए मानक स्थापित किए। भविष्य के विमानों में ये खूबियां दिखेंगी। उद्योग विशेषज्ञ मानते हैं कि सुपरजंबो का दौर खत्म होने से एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दबाव कम होगा। छोटे विमान अधिक रनवे और गेट का उपयोग कर सकते हैं। फिलहाल कुछ चार्टर और वीआईपी ऑपरेटर अभी भी ए-380 का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इनकी संख्या सीमित है। 2026 के बाद आसमान में यह विशाल पक्षी दुर्लभ नज़र आएगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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