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एनएसए हिरासत रद्द होने पर आकृति चौधरी बोलीं – लड़ाई अभी बाकी है

3/9/2026, 2:34:34 am
एनएसए हिरासत रद्द होने पर आकृति चौधरी बोलीं – लड़ाई अभी बाकी है
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ग्रेटर नोएडा की जेल से बाहर आते ही आकृति चौधरी ने मीडिया से बात की और कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लगाया गया आरोप रद्द होना उनके लिए बड़ी राहत की बात है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक शुरुआती कदम है। उन्होंने बताया कि अदालत के फैसले से पहले उन्हें कई महीनों तक बिना किसी ठोस सबूत के हिरासत में रखा गया था, जिससे उनके परिवार और साथी कार्यकर्ताओं को गहरी चिंता हुई। आकृति ने जेल के अंदर के हालात का वर्णन करते हुए कहा कि साथी कैदियों ने उनका मनोबल बढ़ाया, लेकिन जेल प्रशासन पर उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार कई बंदियों को साफ पानी, पर्याप्त भोजन और चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और पुलिस की मनमानी ने मामले को और पेचीदा बना दिया, जिससे न्याय मिलने में देर हुई। स्थानीय वकीलों ने अदालत में दलील दी कि एनएसए का उपयोग श्रमिक अधिकारों की आवाज को दबाने के लिए किया गया था, न कि किसी वास्तविक सुरक्षा खतरे के लिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए हिरासत आदेश को निरस्त कर दिया। फैसले के बाद कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने खुशी जताई, साथ ही चेतावनी दी कि सरकार भविष्य में भी इसी तरह के कठोर कानूनों का दुरुपयोग कर सकती है, इसलिए निगरानी जरूरी है। आकृति ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखें और कानूनी लड़ाई को पूरी मजबूती से लड़ें। उन्होंने कहा कि जनता का समर्थन ही असली ताकत है और मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अब उनकी टीम अगली अदालती सुनवाई की तैयारी में जुट गई है और सभी संबंधित दस्तावेजों को व्यवस्थित कर रही है। इस बीच, मानवाधिकार संगठनों ने मांग की कि सभी गिरफ्तार श्रमिकों और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि एनएसए जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल विरोध की आवाज कुचलने के लिए नहीं होना चाहिए। आकृति ने भरोसा दिलाया कि वह तब तक लड़ती रहेंगी जब तक हर एक व्यक्ति को न्याय नहीं मिल जाता। उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई में समाज के हर वर्ग का साथ मिल रहा है, जो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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