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भारत

1965 की जंग में अल्फ्रेड कुक ने चार पाकिस्तानी सेबर जेट्स से अकेले लोहा लिया

19/9/2026, 11:07:35 pm
1965 की जंग में अल्फ्रेड कुक ने चार पाकिस्तानी सेबर जेट्स से अकेले लोहा लिया
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1965 की भारत‑पाकिस्तान जंग में वायु सेना के कई पायलटों ने असाधारण साहस दिखाया। उनमें एक नाम अल्फ्रेड कुक का भी है, जो तब फ्लाइट लेफ्टिनेंट थे। 5 सितंबर 1965 को कुक अपने मिग‑21 से उड़ान भर रहे थे जब पाकिस्तानी वायु सेना के चार सेबर जेट्स ने उन्हें घेर लिया। दुश्मन के विमानों ने एक साथ हमला बोला, लेकिन कुक ने तेज मोड़ देकर उन्हें चकमा दिया। पहली गोलीबारी में कुक ने दो जेट्स को निशाना बनाया और उन्हें ध्वस्त कर दिया। इसके बाद उनके विमान की मशीनगन की गोलियां खत्म हो गईं। फिर भी उन्होंने हवा में रहकर दुश्मन को भ्रमित किया और अपने साथी पायलटों को सुरक्षित निकलने का मौका दिया। कुक ने रेडियो पर अंतिम संदेश भेजा – “मैं अभी भी लड़ रहा हूँ, पीछे नहीं हटूंगा।” इस संदेश ने ग्राउंड कंट्रोल और साथी पायलटों का मनोबल बढ़ाया। कुछ मिनट बाद उनका विमान दुश्मन की गोली से क्षतिग्रस्त हो गया और कुक शहीद हो गए। उनकी वीरता के लिए बाद में उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। आज भी वायु सेना के प्रशिक्षण में कुक की कहानी उदाहरण के तौर पर पढ़ाई जाती है। उनके साहस ने दिखाया कि एक अकेला पायलट भी बड़े खतरे का सामना कर सकता है। मिग‑21 उस समय भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान था, जबकि पाकिस्तानी सेबर जेट्स अमेरिकी तकनीक पर आधारित थे। कुक ने अपने विमान की गति और मोड़ने की क्षमता का पूरा इस्तेमाल किया। वायु सेना अकादमी में कुक की कहानी नए कैडेट्स को साहस और कर्तव्यपरायणता सिखाने के लिए पढ़ाई जाती है। उनके नाम पर एक प्रशिक्षण स्क्वाड्रन का नामकरण भी किया गया है। देश भर में कई स्मारकों पर कुक की तस्वीर लगी है और स्कूली पाठ्यक्रम में भी उनका जिक्र आता है। युवा पीढ़ी उनके बलिदान से प्रेरणा लेती है। इतिहासकार मानते हैं कि कुक की इस लड़ाई ने 1965 की हवाई जंग का रुख मोड़ने में मदद की। उनके बलिदान को याद करते हुए हर साल वायु सेना दिवस पर विशेष श्रद्धांजलि दी जाती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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