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इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: बुजुर्गों की जान‑माल खतरे में हो तो बेटे‑बहू को घर से निकाल सकता है ट्रिब्यूनल

11/9/2026, 2:09:00 am
इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला: बुजुर्गों की जान‑माल खतरे में हो तो बेटे‑बहू को घर से निकाल सकता है ट्रिब्यूनल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि बुजुर्ग माता‑पिता की जान या संपत्ति को खतरा होने पर ट्रिब्यूनल बेटे या बहू को घर से बेदखल कर सकता है। यह आदेश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया जिसमें एक वृद्ध दंपती ने अपने बेटे और बहू पर मारपीट, धमकी और संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया था। जस्टिस ए.के. सिंह की पीठ ने वृद्धजन सुरक्षा अधिनियम, 2007 के तहत बने ट्रिब्यूनल को यह अधिकार दिया कि वह बुजुर्ग की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए, भले ही वह आर्थिक सहायता से आगे जाकर शारीरिक खतरे को भी रोके। फैसले में स्पष्ट किया गया कि ट्रिब्यूनल केवल पेंशन या भरण‑पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बुजुर्ग को शारीरिक खतरे से बचाने के लिए भी घर से निकाल सकता है। इस निर्णय से उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नई मिसाल बनेगी। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे परिवार में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी। कानूनी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ट्रिब्यूनल के इस अधिकार का दुरुपयोग न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा‑निर्देश और निगरानी तंत्र जरूरी हैं। अदालत ने यह भी कहा कि बेदखली से पहले बुजुर्ग की सहमति, उसकी मानसिक स्थिति और परिस्थितियों की पूरी जांच होनी चाहिए, ताकि गलत फैसले न हों। फैसले के बाद राज्य सरकार से अपेक्षा है कि वह ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया सरल बनाए, जागरूकता अभियान चलाए और बुजुर्गों को उनके अधिकारों की जानकारी दे। इसके अलावा, पुलिस और स्थानीय प्रशासन को भी ट्रिब्यूनल के आदेशों का पालन कराने में सहयोग करना होगा, ताकि बुजुर्ग वास्तव में सुरक्षित रह सकें। पिछले कुछ वर्षों में बुजुर्गों के साथ घरेलू हिंसा के मामले तेजी से बढ़े हैं, और अदालतों में ऐसे केस दर्ज होने लगे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार 2023 में बुजुर्गों के खिलाफ घरेलू हिंसा के 12 हजार से अधिक मामले दर्ज हुए थे। इस फैसले से ट्रिब्यूनल को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, क्योंकि पहले केवल आर्थिक सहायता के आदेश दिए जाते थे। कई राज्यों ने अपने स्तर पर ट्रिब्यूनल की शक्तियां बढ़ाने के लिए नियमों में संशोधन शुरू कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आदेश का असर तभी दिखेगा जब जमीनी स्तर पर जागरूकता और प्रशासनिक सहयोग दोनों मजबूत हों। समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bettiah (Hindi)

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