लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, भारत पर असर

18/8/2026, 5:22:00 am
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, भारत पर असर
Original publisher image
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता गहरा गई है और निवेशक सतर्क हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है, जो पिछले छह महीनों का उच्चतम स्तर है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में किसी भी सैन्य टकराव की आशंका से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है, जिससे कीमतों में और उछाल आ सकता है। भारत अपनी ज़रूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय दरों में बदलाव सीधे घरेलू ईंधन दरों पर असर डालता है। पेट्रोल और डीजल के दाम पहले से ही उच्च स्तर पर हैं और नई वृद्धि से आम उपभोक्ता, ट्रक चालक और सार्वजनिक परिवहन पर बोझ बढ़ेगा। सरकार ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। तेल कंपनियों ने भी संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय दरों के अनुसार घरेलू कीमतों को समायोजित किया जा सकता है, जिससे अगले कुछ हफ्तों में पेट्रोल‑डीजल महंगा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबा खिंचा तो महंगाई दर में तेजी आ सकती है, जिससे रिजर्व बैंक को मौद्रिक नीति कड़ी करनी पड़ सकती है। उपभोक्ता संगठनों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके और गरीब वर्ग पर असर कम हो। कुछ अर्थशास्त्रियों का सुझाव है कि भारत को अपने तेल भंडार बढ़ाने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निवेश तेज करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी झटकों से बचा जा सके। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शांति बहाल होने तक अनिश्चितता बनी रहेगी और भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है। पिछले साल भी इसी तरह के तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के पार चली गई थीं, जिससे भारत को आयात बिल में भारी वृद्धि झेलनी पड़ी थी। इस बार भी सरकारी एजेंसियां आयात विविधीकरण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही हैं, ताकि बाहरी झटकों का प्रभाव कम से कम हो। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित