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अमेरिकी सपने की चकाचौंध में छिपा दर्द, एनआरआई बोले — भारत में मौके बेहतर

20/8/2026, 11:48:06 pm
अमेरिकी सपने की चकाचौंध में छिपा दर्द, एनआरआई बोले — भारत में मौके बेहतर
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अमेरिकन ड्रीम लंबे समय से भारतीय मध्यवर्ग के लिए कामयाबी का प्रतीक रहा है। चमकती कारें, बड़ा घर और डॉलर की तनख्वाह सोशल मीडिया पर खूब दिखाई जाती हैं। मगर कई एनआरआई अब खुलकर बता रहे हैं कि हकीकत तस्वीर से अलग है। सिलिकॉन वैली में काम करने वाले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वीजा की अनिश्चितता, हर साल ग्रीन कार्ड की लंबी कतार और बच्चों की परवरिश में संस्कृति का टकराव असली चुनौतियां हैं। न्यू जर्सी में रहने वाले एक डॉक्टर दंपती ने बताया कि भारत में उनके साथी अब उनसे ज्यादा कमा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यहां 80 घंटे काम करने के बाद भी टैक्स कटकर आधी रकम हाथ में रह जाती है, जबकि भारत में वही हुनर आज ज्यादा इज्जत और पैसा देता है।” आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं (USCIS) के अनुसार भारतीयों के लिए H-1B वीजा अस्वीकृति दर बढ़ी है और ग्रीन कार्ड का बैकलॉग दशकों तक खिंच सकता है। दूसरी ओर भारत की स्टार्टअप अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर नए रास्ते खोल रहे हैं। फिर भी सब निराश नहीं हैं। टेक्सास में बसे एक उद्यमी का कहना है कि जिनके पास विशेषज्ञता है, उनके लिए अमेरिका अब भी बेहतरीन लैब और फंडिंग मुहैया कराता है, बस आंख खोलकर आना चाहिए। कई परिवार अब अमेरिका में बढ़ती महंगाई और स्वास्थ्य खर्च से परेशान हैं। एक सर्वे में 60 फीसदी एनआरआई ने माना कि बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों की देखभाल भारत में ज्यादा सस्ती और सुविधाजनक है। रिमोट वर्क की बढ़ती स्वीकृति ने भी विकल्प बढ़ाए हैं। अब कई टेक कंपनियां भारतीय टैलेंट को घर से काम करने का मौका देती हैं, जिससे वीजा की झंझट कम होती है। इसके अलावा, भारत में नई नीति जैसे प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) और डिजिटल इंडिया ने नौकरियों और उद्यमिता के नए द्वार खोले हैं। जानकार सलाह देते हैं कि फैसला भावुकता में नहीं, ठोस आंकड़ों पर करें। जीवनशैली, पारिवारिक सहारा और कैरियर ग्रोथ – हर पहलू का हिसाब लगाएं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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