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अमेरिका में एच-1बी वीजा पर नई सख्ती, वेंस का दावा- अमेरिकियों की नौकरियां सुरक्षित

16/9/2026, 2:27:31 am
अमेरिका में एच-1बी वीजा पर नई सख्ती, वेंस का दावा- अमेरिकियों की नौकरियां सुरक्षित
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अमेरिका में एच-1बी वीजा पर नई सख्ती, वेंस का दावा- अमेरिकियों की नौकरियां सुरक्षित अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। नए नियम के तहत कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए सालाना कम से कम एक लाख डॉलर (करीब एक करोड़ रुपये) वेतन देना होगा। वेंस ने साफ कहा कि इस कदम से अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां नहीं छिनेंगी और घरेलू प्रतिभा को प्राथमिकता मिलेगी। यह घोषणा व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान की गई, जहां वेंस के साथ श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को यह नीति पेश की। इसका सीधा असर भारतीय आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा, जो एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी हैं। नए वेतन फ्लोर का मकसद सस्ते विदेशी श्रम पर रोक लगाना है। व्हाइट हाउस के मुताबिक मौजूदा व्यवस्था में कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारी रखकर अमेरिकियों को किनारे कर देती हैं। अब न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाकर 1,00,000 डॉलर कर दी गई है, जो पहले 60,000 डॉलर के आसपास थी। यह बढ़ोतरी करीब 67 फीसदी की है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा। वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "हमारी प्राथमिकता अमेरिकी श्रमिक हैं। एच-1बी वीजा का दुरुपयोग रोकने के लिए वेतन सीमा बढ़ाई गई है।" उन्होंने दावा किया कि इससे योग्य अमेरिकियों को मौका मिलेगा और वेतन दबाव कम होगा। हालांकि आलोचकों का कहना है कि ऊंचा वेतन फ्लोर छोटी कंपनियों और स्टार्टअप के लिए मुश्किल खड़ी करेगा, जो महंगे विदेशी टैलेंट का खर्च नहीं उठा सकतीं। सिलिकॉन वैली की कई बड़ी फर्मों ने निजी तौर पर चिंता जताई है कि इससे शोध और विकास कार्य प्रभावित होंगे। भारतीय उद्योग संगठन नैसकॉम ने चिंता जताई है। उसका अनुमान है कि नए नियम से हर साल 30-40 हजार भारतीय पेशेवर प्रभावित होंगे। कई कंपनियां पहले ही कनाडा और यूरोप में दफ्तर खोलने पर विचार कर रही हैं। अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी चेताया है कि प्रतिभा पलायन से नवाचार प्रभावित होगा और अमेरिका की तकनीकी बढ़त कमजोर पड़ सकती है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एमेजॉन जैसी कंपनियों ने अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उद्योग सूत्रों के मुताबिक वे लॉबिंग तेज करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने नई दिल्ली में कहा कि भारत इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर उठाएगा। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में भी यह विषय आ सकता है। जानकार मानते हैं कि अमेरिका को कुशल प्रतिभा की जरूरत बनी रहेगी, लेकिन नियम सख्त होंगे। भारतीय आईटी कंपनियां अब स्थानीय भर्ती बढ़ाने और नियरशोरिंग मॉडल अपनाने पर जोर दे रही हैं। टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी बड़ी फर्मों ने पहले ही अमेरिका में हजारों स्थानीय कर्मचारी रखे हैं। एच-1बी वीजा पर बहस पुरानी है। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में भी सख्ती हुई थी, मगर अदालतों ने कई फैसले पलट दिए थे। इस बार प्रशासन कार्यकारी आदेश के बजाय विधायी रास्ता अपनाने के संकेत दे रहा है, जिससे बदलाव टिकाऊ हों। कांग्रेस में दोनों दलों के कुछ सांसदों ने भी वेतन सीमा बढ़ाने का समर्थन किया है। भारतीय पेशेवरों के लिए अनिश्चितता बढ़ गई है और कई वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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