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अमेरिका और यूरोपीय संघ ने ईरान पर साझा प्रतिबंध लगाए, तेल व वित्तीय नेटवर्क पर कसा शिकंजा

4/9/2026, 2:47:00 am
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने ईरान पर साझा प्रतिबंध लगाए, तेल व वित्तीय नेटवर्क पर कसा शिकंजा
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अमेरिका और यूरोपीय संघ ने मिलकर ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। दोनों पक्षों ने ईरान के तेल निर्यात और वित्तीय लेनदेन को निशाना बनाया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान की तेल कंपनियों और उनसे जुड़े बैंकों पर प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय संघ ने भी इसी तरह के कदम उठाते हुए SWIFT नेटवर्क से ईरानी बैंकों को बाहर किया है। इन कदमों का मकसद ईरान की आमदनी को कम करना है ताकि वह परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए धन न जुटा सके। तेहरान ने प्रतिबंधों को 'अन्यायपूर्ण' बताया और कहा कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए नए रास्ते तलाशेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल बाजार पर असर पड़ सकता है क्योंकि ईरान दुनिया का तीसरा बड़ा तेल निर्यातक है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक प्रतिबंध रहने से ईरान की मुद्रा और महंगाई दर और बिगड़ सकती है। भारत जैसे देश जो ईरानी तेल खरीदते हैं, उन्हें वैकल्पिक स्रोत ढूंढने पड़ सकते हैं, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष बातचीत के रास्ते खुले रखने की बात कह रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। पिछले साल अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर एकतरफा प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन यूरोपीय संघ तब इसमें शामिल नहीं हुआ था। अब दोनों पक्षों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि वे ईरान के परमाणु समझौते के उल्लंघन को रोकने के लिए मिलकर काम करेंगे। ईरान ने इसके जवाब में अपने तेल उत्पादन को बढ़ाने की योजना घोषित की है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निर्यात मार्ग बंद होने से लाभ कम होगा। विश्व बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि ईरान की जीडीपी इस साल 3 प्रतिशत तक सिकुड़ सकती है यदि प्रतिबंध जारी रहे। भारत सरकार ने कहा है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्रोतों पर ध्यान दे रही है और ईरान से तेल खरीद कम करेगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वह मानवीय सहायता के रास्ते खुले रखे ताकि आम नागरिक प्रभावित न हों। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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