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भारत

असम-मेघालय सीमा पर वाहनों की आवाजाही बहाल, विवाद सुलझने की उम्मीद

22/8/2026, 5:23:45 am
असम-मेघालय सीमा पर वाहनों की आवाजाही बहाल, विवाद सुलझने की उम्मीद
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असम और मेघालय के बीच लंबे समय से चल रहा सीमा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंचा है। जोराबात चेकपोस्ट पर पिछले हफ्ते से बंद पड़ी गाड़ियों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। असम के कैब ऑपरेटरों ने शिलॉन्ग में हुई हिंसा के बाद मेघालय की गाड़ियों को रोक दिया था, जिससे सैकड़ों यात्री फंस गए। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने शनिवार को गुवाहाटी में बैठक की और लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत कैब चालकों को सुरक्षा का आश्वासन दिया गया और बैरियर हटाने का आदेश तुरंत जारी हुआ। पहले दिन से ही सैकड़ों यात्री और मालवाहक वाहन बिना रुके गुजरने लगे, जिससे व्यापारिक गतिविधि तेज़ हुई। स्थानीय व्यापारियों ने राहत की सांस ली क्योंकि सामान की आपूर्ति फिर से सामान्य होने लगी और मंडी में भीड़ बढ़ी। मेघालय के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम लंबे समय से लंबित सीमा मुद्दे के स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम है। असम के मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिलाया कि आगे की बातचीत में सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखा जाएगा। हालांकि, कुछ स्थानीय नेताओं ने चेतावनी दी कि बिना लिखित समझौते के विवाद फिर से भड़क सकता है। केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों से अनुरोध किया है कि वे संयुक्त समिति गठित कर सीमा निर्धारण का काम तेज़ी से पूरा करें। आने वाले हफ्तों में दोनों राज्यों के अधिकारी फिर मिलेंगे ताकि स्थायी समझौते का मसौदा तैयार किया जा सके। इस बीच, जोराबात पर तैनात पुलिस बल ने यातायात को सुचारु रखने के लिए अतिरिक्त चौकियां स्थापित की हैं। नागरिक संगठनों ने भी दोनों सरकारों से अपील की है कि वे सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाएं, ताकि आम जनता को परेशानी न हो। पिछले वर्ष भी इसी जोराबात पर एक हफ्ते तक मालवाहक ट्रक रुके रहे थे, जिससे दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ था। तब भी केंद्र ने मध्यस्थता की थी, लेकिन लिखित समझौता नहीं होने से तनाव फिर बढ़ गया। इस बार दोनों मुख्यमंत्रियों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि सीमा निर्धारण के लिए तकनीकी टीम गठित की जाएगी। तकनीकी टीम में सर्वे ऑफ इंडिया, राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जो जीपीएस आधारित नक्शे तैयार करेंगे। जनता को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत होगा और सीमावर्ती गांवों में शांति लौटेगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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