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बाढ़ में डूबा ‘फौजियों का गांव’, सांसद‑विधायक बेखबर

5/9/2026, 3:27:54 am
बाढ़ में डूबा ‘फौजियों का गांव’, सांसद‑विधायक बेखबर
बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित एक छोटा गांव, जिसे लोग ‘फौजियों का गांव’ कहते हैं, पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ की चपेट में आ गया। नदी का जल स्तर अचानक बढ़ गया और गांव की अधिकांश झुग्गियाँ और घर पानी में डूब गए। ग्रामीण बताते हैं कि पानी लगभग तीन फीट तक पहुंच गया है और खेत‑खलिहान पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। इस गांव का नाम इसलिए पड़ा है क्योंकि यहाँ कई पूर्व सैनिक और उनके परिवार रहते हैं। लगभग ciento पचास परिवारों में से अधिकांश किसी न किसी रूप में सेना से जुड़े रहे हैं। बाढ़ से पहले भी यहाँ बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, लेकिन अब स्थिति और खराब हो गई है। पीने के पानी की किल्लत, बिजली की आपूर्ति ठप्प और टूटी सड़कों के कारण रोजमर्रा की जिंदगी रुक गई है। स्थानीय सांसद और विधायक ने अब तक गांव का दौरा नहीं किया है। ग्रामीणों ने कई बार फोन, सोशल मीडिया और लेख के जरिए मदद की गुहार लगाई, पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला। जिला प्रशासन ने केवल एक अस्थायी राहत शिविर लगाया है, जहाँ खाना‑पीना सीमित मात्रा में उपलब्ध है। बुजुर्ग पूर्व सूबेदार रामप्रसाद कहते हैं, “हमने देश की रक्षा की, अब हमारी रक्षा कौन करेगा?” उनकी यह बात हर घर में गूंज रही है। महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे रात बिता रहे हैं, जबकि मवेशी भी पानी में फंसे हुए हैं। पशुपालन पर निर्भर परिवारों की आय पूरी तरह से बंद हो गई है। बच्चों की स्कूल बुक्स भी पानी में भिगो गई हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। जिला प्रशासन का दावा है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेजी से चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों का अनुभव इससे अलग है। वे कहते हैं कि राहत शिविर में मिलने वाला भोजन अपर्याप्त है और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। कुछ बुजुर्गों ने बताया कि उन्हें अपने रोज़ की दवाइयाँ भी नहीं मिल पा रही हैं। वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि पानी की तेज धार में गांव की मुख्य गली बह गई है और कई घरों की छतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। एनडीआरएफ की टीम अब तक नहीं पहुंची है, जबकि स्थानीय पत्रकारों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि स्थायी पुनर्वास योजना बनी, सड़कें मरम्मत की जाएं और बिजली‑पानी की आपूर्ति बहाल की जाए। वे यह भी चाहते हैं कि एनडीआरएफ की टीम जल्द पहुंचे और राहत सामग्री वितरित हो। केवल तभी इस ‘फौजियों का गांव’ के निवासी अपने जीवन को फिर से पटरी पर ला सकेंगे।
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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