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बाब अल-मंदेब: हूती हमलों ने सऊदी अरब की रणनीतिक मजबूरी उजागर की

18/9/2026, 3:11:10 pm
बाब अल-मंदेब: हूती हमलों ने सऊदी अरब की रणनीतिक मजबूरी उजागर की
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बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य एक बार फिर सुर्खियों में है। यमन के हूती विद्रोहियों ने इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वे सऊदी अरब की उस कमज़ोरी का फ़ायदा उठा रहे हैं जो बरसों के संघर्ष और बदलती प्राथमिकताओं से पैदा हुई है। साल 2015 से सऊदी अरब की अगुआई वाला गठबंधन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के पक्ष में लड़ रहा था। हूती विद्रोही राजधानी सना समेत उत्तर यमन के बड़े हिस्से पर काबिज थे। लड़ाई में हज़ारों लोग मारे गए और देश भुखमरी के कगार पर पहुंच गया। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से संघर्ष विराम हुआ। कुछ साल तक हालात शांत रहे। सऊदी अरब ने अपनी सेना वापस खींचनी शुरू की और आंतरिक सुधारों पर ध्यान देने लगा। लेकिन अक्टूबर 2023 में इज़राइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद तस्वीर बदल गई। हूती विद्रोहियों ने खुद को ‘अंसार अल्लाह’ कहते हुए एलान किया कि वे इज़राइल से जुड़े हर जहाज को बाब अल-मंदेब में रोकेंगे। उन्होंने दर्जनों वाणिज्यिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल दागे। कई जहाज डूबे या क्षतिग्रस्त हुए। बड़ी शिपिंग कंपनियों ने रास्ता बदलकर अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाना शुरू कर दिया। सऊदी अरब इस संकट में फंसा हुआ है। एक तरफ वह लाल सागर में अपने तट और तेल निर्यात टर्मिनलों की हिफाज़त चाहता है। दूसरी तरफ वह हूती विद्रोहियों से सीधी टक्कर लेने से बच रहा है। रियाद पिछले दो साल से हूती नेताओं के साथ गुप्त बातचीत कर रहा है ताकि यमन में स्थायी शांति समझौता हो सके। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ‘विज़न 2030’ योजना के तहत विदेशी निवेश और पर्यटन उनकी प्राथमिकता है। नया मोर्चा खोलना उनके आर्थिक एजेंडे को पटरी से उतार सकता है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ‘ऑपरेशन प्रॉस्पेरिटी गार्जियन’ शुरू किया है, लेकिन हूती हमले रुके नहीं हैं। सऊदी अरब इस गठबंधन में खुलकर शामिल नहीं हुआ है। वह नहीं चाहता कि ईरान समर्थित हूती उसके तेल प्रतिष्ठानों पर पलटवार करें, जैसा 2019 में अबकैक और खुरैस पर हुआ था। भारत के लिए यह चिंता की बात है। हमारा 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात इसी रास्ते से आता है। मालभाड़ा बढ़ने से महंगाई का दबाव बन रहा है। भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, लेकिन समस्या का स्थायी हल राजनीतिक ही हो सकता है। जानकार मानते हैं कि जब तक यमन में समावेशी सरकार नहीं बनती और हूती विद्रोही मुख्यधारा में नहीं आते, बाब अल-मंदेब अशांत रहेगा। सऊदी अरब की रणनीतिक मजबूरी का फायदा उठाकर हूती अपनी बार्गेनिंग पावर बढ़ा रहे हैं। दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्ग पर अनिश्चितता का यह दौर जल्द खत्म होता नहीं दिखता। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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