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हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा बांग्लादेश, तारिक की भारत यात्रा खटाई में

17/8/2026, 11:43:40 pm
हसीना के प्रत्यर्पण पर अड़ा बांग्लादेश, तारिक की भारत यात्रा खटाई में
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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। ढाका में अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि हसीना को वापस लाने के लिए हर संभव कूटनीतिक और कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। हसीना अगस्त 2024 में भारी विरोध-प्रदर्शन के बाद भारत चली आई थीं और तब से यहीं रह रही हैं। इस बीच, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। तारिक बीएनपी की कार्यवाहक अध्यक्ष हैं और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। उनकी यात्रा को दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा था। लेकिन हसीना के मुद्दे पर भारत के रुख से नाराज बांग्लादेश ने अब इस यात्रा पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेश का मानना है कि भारत हसीना को शरण देकर उसके आंतरिक मामलों में दखल दे रहा है। ढाका ने नई दिल्ली को साफ संदेश दिया है कि प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना को सौंपा जाए। भारत ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनयिक हलकों में माना जा रहा है कि नई दिल्ली इस मसले को सावधानी से संभालना चाहता है। दोनों देशों के रिश्ते पिछले कुछ महीनों में तेजी से बदले हैं। हसीना के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंध काफी मजबूत थे — व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग में काफी प्रगति हुई। लेकिन हसीना के जाने के बाद बनी अंतरिम सरकार का रुख अलग है। वह भारत पर दबाव बनाने के लिए चीन और पाकिस्तान के करीब भी जाती दिख रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तारिक रहमान की यात्रा रद्द होने या टलने से दोनों देशों के बीच संवाद का एक अहम रास्ता बंद हो सकता है। तारिक को बांग्लादेश की भावी राजनीति में बड़ी भूमिका का दावेदार माना जाता है। उनकी भारत यात्रा से नई दिल्ली को बांग्लादेश के राजनीतिक मिजाज को समझने का मौका मिलता। फिलहाल गेंद भारत के पाले में है। नई दिल्ली को तय करना है कि वह हसीना के मुद्दे पर कितना लचीला रुख अपनाता है और बांग्लादेश के साथ संबंधों को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाता है। दोनों देशों की भौगोलिक निकटता और साझा हितों को देखते हुए तनाव लंबा खिंचना किसी के हक में नहीं है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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