लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
bihar

बेगूसराय बना बिहार का पहला कार्बन क्रेडिट जिला, किसानों को नई कमाई

9/9/2026, 12:10:08 pm
बेगूसराय बना बिहार का पहला कार्बन क्रेडिट जिला, किसानों को नई कमाई
बेगूसराय ने बिहार में पहली बार कार्बन क्रेडिट योजना की शुरुआत की है, जिससे खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त आमदनी का नया रास्ता मिला है। राज्य सरकार के कृषि विभाग और पर्यावरण मंत्रालय ने संयुक्त रूप से इस पहल को डिजाइन किया है और इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित की गई है। योजना के तहत किसान अपने खेतों में जैविक खाद का उपयोग, कम जुताई, फसल चक्र और जल संरक्षण जैसी प्रथाएं अपनाएंगे, जिससे मिट्टी में कार्बन का भंडारण बढ़ेगा। कृषि वैज्ञानिक और जलवायु विशेषज्ञ गांव-गांव जाकर प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रहे हैं, जहां किसानों को कार्बन मापन के लिए सरल मोबाइल ऐप और सेंसर का इस्तेमाल सिखाया जा रहा है। पहले चरण में बेगूसराय के 12 प्रखंडों में लगभग 500 हेक्टेयर भूमि को पंजीकृत किया गया है और प्रत्येक हेक्टेयर पर लगभग दो हजार रुपये का कार्बन क्रेडिट मिलने का अनुमान है। जिला कृषि अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि यह योजना न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएगी। किसान रामकुमार सिंह ने कहा, "पहले हम केवल अनाज बेचते थे, अब कार्बन क्रेडिट बेचकर भी आमदनी बढ़ा सकते हैं, यह हमारे लिए बड़ी राहत है।" अगले छह महीने में इस मॉडल को पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है, ताकि पूरे राज्य के किसान इसका लाभ उठा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल रही तो बिहार कृषि क्षेत्र में कार्बन बाजार का अगुआ बन सकता है। कार्बन क्रेडिट की पुष्टि के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) और अंतरराष्ट्रीय मानक संस्था वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (VCS) की मंजूरी ली जाएगी, जिससे किसानों को वैश्विक बाजार में विश्वसनीयता मिले। वित्तीय संस्थान जैसे नाबार्ड और ग्रामीण बैंक इस योजना के तहत कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराएंगे, ताकि किसान आवश्यक उपकरण और बीज खरीद सकें। सरकार ने योजना के प्रचार के लिए डिजिटल मीडिया, स्थानीय रेडियो और पंचायत स्तरीय बैठकों का सहारा लिया है, जिससे अधिकतम किसान जागरूक हो सकें। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

संबंधित