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बिहार में सात नदियों का उफान, चंपारण से भागलपुर तक तबाही

3/9/2026, 1:43:31 am
बिहार में सात नदियों का उफान, चंपारण से भागलपुर तक तबाही
बिहार में इस समय सात नदियाँ उफान पर हैं। कोसी, गंडक, सोन, गंगा, बूढ़ी गंडक, कमला और बागमती का पानी खेतों और गाँवों में घुस गया है। चंपारण से लेकर भागलपुर तक बाढ़ ने जनजीवन अस्त‑व्यस्त कर दिया है। प्रशासन ने राहत शिविर लगाए हैं और एनडीआरएफ की टीमें नाव लेकर प्रभावित इलाकों में पहुँच रही हैं। मुख्यमंत्री ने आपात बैठक बुलाई और सभी जिलाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। ग्रामीण अपने मवेशियों और अनाज को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। कई घरों की दीवारें ढह गई हैं और सड़कें जलमग्न हो गई हैं। लोग रात‑भर जागकर पानी के स्तर पर नजर रख रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और बारिश की चेतावनी दी है। नदियों का जलस्तर अभी और बढ़ सकता है। इसलिए प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वालों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। बाढ़ से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसान चिंतित हैं कि खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद न हो जाए। सरकार ने मुआवजे की घोषणा की है लेकिन वितरण में समय लग सकता है। स्थानीय स्वयंसेवी संगठन और एनजीओ भी राहत सामग्री बाँट रहे हैं। पीड़ित परिवारों को पीने का पानी, खाना और दवाइयाँ पहुँचाई जा रही हैं। बचाव दल लगातार नावों और हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों को निकाल रहे हैं। अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। मेडिकल टीमें डायरिया और त्वचा रोग के मामलों पर नजर रख रही हैं। बिजली आपूर्ति कई जिलों में ठप है। ट्रांसफॉर्मर पानी में डूब गए हैं और मरम्मत में कई दिन लग सकते हैं। संचार नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है, जिससे सूचना पहुँचने में देरी हो रही है। पशुपालन विभाग ने पशुओं के लिए अस्थायी शेड बनाए हैं। दूध उत्पादन पर असर पड़ रहा है और दूध की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। किसानों को बीज और खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है और त्वरित राहत की मांग की है। संसदीय समिति ने बाढ़ प्रबंधन की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
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