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बिहार बोर्ड ने मार्कशीट से ‘फ़ेल’ शब्द हटाया, अब नहीं दिखेगा असफलता का टैग

28/8/2026, 2:12:26 am
बिहार बोर्ड ने मार्कशीट से ‘फ़ेल’ शब्द हटाया, अब नहीं दिखेगा असफलता का टैग
बिहार विद्यालय परीक्षा बोर्ड ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। बोर्ड ने तय किया है कि कक्षा 10 और 12 की मार्कशीट पर अब ‘फ़ेल’ शब्द नहींprinted किया जाएगा। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य उन विद्यार्थियों पर लगने वाले सामाजिक कलंक को कम करना है जो परीक्षा में अनुतीर्ण घोषित होते हैं। पिछले कई सालों से शिक्षाविद् और अभिभावक मांग कर रहे थे कि परीक्षा परिणाम में नकारात्मक शब्दों का प्रयोग avoided जाए। उन्होंने बताया कि ‘फ़ेल’ जैसे शब्द छात्रों के自我 विश्वास को प्रभावित करते हैं और आगे की पढ़ाई में बाधा बनते हैं। बोर्ड ने इस प्रतिक्रिया को गंभीरता से लिया। नई प्रणाली के अनुसार, अगर कोई छात्र निर्धारित अंक लाने में असuccess रहता है तो मार्कशीट पर ‘अनुत्तीर्ण’ या ‘कम्पार्टमेंट’ जैसे शब्द लिखे जाएंगे। ये शब्द केवल परिणाम की स्थिति बताते हैं और किसी भी तरह की नकारात्मक छवि नहीं देते। बोर्ड के सचिव ने बताया कि बदलाव केवल मार्कशीट के प्रिंट प्रारूप में है, मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। परीक्षा की कठिनाई स्तर, मूल्यांकन मानक और पासिंग क्राइटेरिया पहले की तरह ही लागू रहेंगे। इस कदम से उम्मीद है कि छात्रों में परीक्षा के प्रति डर कम होगा और वे अपने कमजोर विषयों पर अधिक ध्यान दे पाएंगे। अभिभावक भी इस परिवर्तन को सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि अब बच्चों को परिणाम के आधार पर ताना नहीं मारा जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा परिवर्तन दीर्घकाल में शैक्षिक परिणामों को सुधार सकता है। जब छात्र को ‘फ़ेल’ लेबल नहीं मिलता तो वह दोबारा प्रयास करने में अधिक प्रेरित महसूस करता है। बोर्ड ने कहा कि नई मार्कशीट डिज़ाइन को सभी जिला स्तर के कार्यालयों में भेज दिया गया है और आगामी परीक्षाओं से इसे लागू कर दिया जाएगा। शिक्षकों को नए प्रारूप के बारे में प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। इस घोषणा के साथ बिहार बोर्ड उन कुछ राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने परीक्षा परिणामों की भाषा को अधिक संवेदनशील बनाया है। पहले केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने similar कदम उठाए थे। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इस बदलाव से लाभ होने की उम्मीद है, जहां सामाजिक दबाव अधिक होता है। उम्मीद है कि इससे dropout दर में भी कमी आएगी। अंत में, बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव केवल भाषा का है, न कि मानकों का। विद्यार्थियों को अभी भी समान मेहनत और तैयारी की आवश्यकता होगी, पर अब उन्हें परिणाम के शब्द में कम नकारात्मकता महसूस होगी। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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