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बिहार में मानसून की 82 दिन में 40% कम बारिश, 12 दिन पहले वापसी

2/9/2026, 12:06:25 am
बिहार में मानसून की 82 दिन में 40% कम बारिश, 12 दिन पहले वापसी
बिहार में इस साल मानसून का व्यवहार सामान्य से अलग दिख रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मानसून के आरंभ से लेकर अब तक 82 दिन में राज्य को सिर्फ 60% औसत बारिश मिली है, यानी 40% की कमी। इस कमी का मुख्य कारण मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से आने वाली मानसूनी हवाओं की कमजोरी और पश्चिमी विक्षोभ का कम प्रभाव है। IMD के अनुसार, राज्य के अधिकांश जिलों में बारिश औसत से काफी नीचे रही है, विशेषकर उत्तर बिहार के जिले जैसे सीतामढ़ी, मुज़फ्फरपुर और दरभंगा में स्थिति सबसे खराब है। मौसम विज्ञानी बताते हैं कि सामान्यतः मानसून बिहार में 30 सितंबर तक रहता है, लेकिन इस साल वेदिक मॉडल और सैटेलाइट डेटा से संकेत मिल रहा है कि यह 18 सितंबर तक वापस ले लिया जा सकता है, यानी लगभग 12 दिन पहले। ऐसे में किसानों को चिंता सता रही है। खरीफ फसल जैसे धान, मक्का और अरहर की बुआई पहले ही हो चुकी है, लेकिन कम बारिश के कारण खेतों में पानी की कमी दिख रही है। कुछ इलाकों में सिंचाई के लिए groundwater पर अधिक निर्भरता बढ़ गई है, जिससे जलस्तर में गिरावट की आशंका है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर के दूसरे metà में एक-दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकते हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद है। इससे धान के transplanting और pozdharai के चरण में कुछ राहत मिल सकती है। राज्य सरकार ने भी प्रतिक्रिया दी है। कृषि विभाग ने प्रभावित जिलों में अतिरिक्त सिंचाई संसाधनों की व्यवस्था करने का आदेश दिया है, साथ ही किसानों को सूक्ष्म सिंचाई और बूंद‑बूंद सिंचाई के उपयोग पर सब्सिडी बढ़ाने की घोषणा की है। वित्त विभाग ने भी फसल बीमा के दावों को तेजी से प्रक्रिया में लाने का निर्देश दिया है। कुल मिलाकर, बिहार को इस मानसून सीजन में सतर्क रहना होगा। यदि सितंबर में अपेक्षित बारिश नहीं होती है, तो रबी फसल की तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों की सलाह है कि किसान जल संरक्षण के उपायों पर ध्यान दें और लंबी अवधि की योजना बनाते समय जल उपलब्धता के अनुमान को ध्यान में रखें। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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