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बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: अब दो लाख तक का ऋण बिना गारंटी

21/8/2026, 12:00:00 am
बिहार में स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड: अब दो लाख तक का ऋण बिना गारंटी
बिहार शिक्षा वित्त निगम ने स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब प्रदेश के विद्यार्थी दो लाख रुपये तक का ऋण बिना किसी गारंटी के ले सकते हैं। यह कदम उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत को कम करने के लिए उठाया गया है। निगम के प्रबंध निदेशक ने बताया कि योजना का लाभ सरकारी और निजी दोनों संस्थानों के छात्रों को मिलेगा। ऋण की ब्याज दर चार प्रतिशत सालाना तय की गई है। अनुसूचित जाति, जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को दो प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलेगी। ऋण की अधिकतम अवधि पांच साल रखी गई है। कोर्स पूरा होने के बाद छह महीने की मोहलत दी जाएगी, जिसके बाद समान मासिक किस्तों में भुगतान शुरू होगा। आवेदन के लिए छात्र को आधार कार्ड, पैन कार्ड, पिछली कक्षा का प्रमाण पत्र और संस्थान का प्रवेश पत्र जमा करना होगा। सभी दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जा सकते हैं। निगम ने एक मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है, जिससे आवेदन की स्थिति तुरंत पता चल सके। योजना में इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन, कानून और कृषि जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शामिल हैं। गैर-व्यावसायिक स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए भी ऋण उपलब्ध होगा। निगम ने कहा कि इस वर्ष करीब 50 हजार छात्रों को लाभ मिलने का अनुमान है। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 रखी गई है। हेल्पलाइन नंबर 1800-123-4567 पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक सहायता ली जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट www.befc.bihar.gov.in पर जाएं। निगम ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ समझौता किया है, जिससे ऋण राशि 48 घंटे में छात्र के खाते में पहुँच जाए। कोई प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा। डिजिटल KYC के माध्यम से सत्यापन तुरंत पूरा होता है। पिछले वर्ष इसी योजना के तहत 30 हजार छात्रों को 1.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया था। इस बार लक्ष्य 50 हजार छात्रों तक पहुँचाने का है। निगम के अनुसार ऋण वितरण में 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह योजना बिहार के युवाओं को आर्थिक बाधाओं से मुक्त करेगी। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे समय पर आवेदन करें और अपने सपनों को पूरा करें। निगम ने शिकायत निवारण के लिए एक समर्पित पोर्टल शुरू किया है। छात्र किसी भी समस्या की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। निगम की टीम 24 घंटे में समाधान देने का प्रयास करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से बिहार का सकल नामांकन अनुपात अगले तीन वर्षों में पांच प्रतिशत बढ़ सकता है। उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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