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भाजपा में उलझन: तृणमूल के बागी सांसदों की बेचैनी बढ़ी, बंगाल इकाई का विरोध बना वजह

16/9/2026, 1:04:54 am
भाजपा में उलझन: तृणमूल के बागी सांसदों की बेचैनी बढ़ी, बंगाल इकाई का विरोध बना वजह
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पिछले कुछ हफ्तों में तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसदों ने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के प्रति खुलकर नाराजगी जताई है। वे कहते हैं कि पार्टी में उनकी बात नहीं सुनी जा रही और बंगाल की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। ये सांसद पहले तृणमूल के टिकट पर चुने गए थे, लेकिन अब भाजपा की संसदीय बैठकों में हिस्सा लेते हैं। उनका आरोप है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें किनारे कर दिया जाता है। भाजपा की बंगाल इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने इन नेताओं के खिलाफ खुलकर विरोध दर्ज कराया है। उनका तर्क है कि बाहरी चेहरों को लाने से पार्टी की स्थानीय पहचान कमजोर होगी। दिल्ली में हुई कोर कमेटी की बैठक में यह तनाव साफ दिखा। वरिष्ठ नेताओं ने बागी सांसदों को साथ रखने या बंगाल‑केंद्रित एजेंडे पर कायम रहने पर बहस की। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने धैर्य रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की पहुँच बढ़ाना जरूरी है। उधर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस असंतोष को भाजपा की अंदरूनी कमजोरी बताया है। उन्होंने दावा किया कि बिना मजबूत स्थानीय जड़ों के भाजपा बंगाल में जीत नहीं सकती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर भाजपा इन विरोधी स्वरों को नहीं सुलझा पाती तो बंगाल में उसकी चुनावी संभावनाओं पर असर पड़ेगा। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि जल्द ही एक समन्वय समिति बनाई जा सकती है ताकि दोनों पक्षों की शिकायतें सुनी जाएं। अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ रही है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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