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भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में दो मुस्लिम नेता: यूपी से क्यों, क्या असर पड़ेगा?

19/8/2026, 1:40:05 am
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में दो मुस्लिम नेता: यूपी से क्यों, क्या असर पड़ेगा?
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भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में दो मुस्लिम चेहरों को जगह दी है। डॉ. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को अलग‑अलग ज़िम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। डॉ. तारिक मंसूर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से आते हैं। वे पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। पार्टी ने उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया है। कुंवर बासित अली भी यूपी के ही बरेली क्षेत्र के हैं। वे युवा नेता के तौर पर पहचाने जाते हैं और पसमांदा मुस्लिम समुदाय के बीच काम करते रहे हैं। उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है। दोनों की नियुक्ति यूपी से ही क्यों हुई, इसे समझने के लिए पसमांदा रणनीति देखनी होगी। भाजपा पिछले कुछ सालों से पसमांदा मुस्लिमों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है। यूपी में इस समुदाय की आबादी अच्छी है और वे विधानसभा चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंसूर का चिकित्सा पृष्ठभूमि उन्हें स्वास्थ्य योजनाओं में मुस्लिम परिवारों तक पहुँचाने में मदद करेगी। बासित अली की युवा छवि और ज़मीनी संपर्क पसमांदा युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ये नियुक्तियाँ 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुस्लिम वोट बैंक का विस्तार कर सकती हैं। हालांकि, विरोधी दल इसे केवल प्रतीकात्मक बता रहे हैं। डॉ. मंसूर ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस किया और फिर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में सेवा दी। उन्होंने कोरोना काल में मुफ्त जांच शिविर लगाए थे, जिससे उन्हें स्थानीय पहचान मिली। बासित अली ने बरेली के एक निजी कॉलेज से बीटेक किया और फिर सामाजिक संगठन ‘पसमांदा जागृति मंच’ की स्थापना की। उन्होंने रोज़गार मेले और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देना चाहती है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पसमांदा मुस्लिमों की आर्थिक उन्नति पार्टी की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई के प्रवक्ता ने बताया कि दोनों नेताओं को जल्द ही ज़िला स्तर पर दौरे करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका पहला दौरा लखनऊ और वाराणसी में होगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर ये नेता ज़मीनी स्तर पर विश्वसनीयता बनाते हैं, तो 2027 के चुनाव में मुस्लिम वोटों का 5‑7 प्रतिशत भाजपा की ओर खिसक सकता है। आने वाले महीनों में दोनों नेताओं की गतिविधियों पर नज़र रहेगी। देखना होगा कि वे कितनी तेज़ी से समुदाय के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर ला पाते हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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