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ब्रिक्स 2026: जब दुनिया फँसी, भारत ने दिखाया रास्ता; अब यूपीआई‑एनडीबी से बदलेंगे विश्व नियम

8/9/2026, 8:09:09 pm
ब्रिक्स 2026: जब दुनिया फँसी, भारत ने दिखाया रास्ता; अब यूपीआई‑एनडीबी से बदलेंगे विश्व नियम
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ब्रिक्स 2026 के शिखर सम्मेलन में दुनिया कई आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रही थी। वैश्विक मंदी, आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं और बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती तनाव ने कई देशों को असुरक्षित महसूस कराया। ऐसे माहौल में भारत ने सिर्फ अपनी शिकायतें रखने के बजाय सक्रिय भूमिका निभाते हुए सुधारों का रोडमैप पेश किया। इसके बाद भारत ने अपने अनुभव को आधार बनाते हुए यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की योजना बनाई। यूपीआई ने 국내 में त्वरित, 저비용 और सुरक्षित डिजिटल भुगतान को संभव बनाया है, और अब इसका उपयोग सीमा पार लेन-देन के लिए किया जा रहा है। pilot परियोजनाओं में संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और फ्रांस जैसे paesi के साथ जोड़े जा रहे हैं, जिससे लेन-देन की लागत घटती है और Settlement का समय घटकर सेकंडों में आ जाता है। इसके साथ ही न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) ने भी अपनी भूमिका बढ़ाई है। एनडीबी ने Infrastructure और हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए विकासशील देशों को किफायती ऋण प्रदान किए हैं। अब वह यूपीआई के डिजिटल मंच को अपने वित्तीय उत्पादों में एकीकृत करने पर काम कर रहा है, ताकि ऋण वितरण, repayments और ट्रैकिंग को स्वचालित बनाया जा सके। इन दो स्तंभों — यूपीआई का त्वरित भुगतान नेटवर्क और एनडीबी का विकास वित्त — को जोड़कर भारत एक नया वैश्विक वित्तीय फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। इस फ्रेमवर्क का लक्ष्य legaçy 시스템 (जैसे SWIFT) पर निर्भरता कम करना, लेन-देन की पारदर्शिता बढ़ाना और विकासशील देशों को वैश्विक व्यापार में बराबर की भागीदारी दिलाना है। अगले 18 महीनों में यूपीआई‑एनडीबी गठबंधन के तहत तीन मुख्य कदम उठाए जाएंगे: पहला, सीमा‑पार real‑time payments के लिए मानक API जारी करना; दूसरा, एनडीबी द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं में यूपीआई‑आधारित भुगतान गेटवे को अनिवार्य बनाना; तीसरा, सभी बrics सदस्यों के लिए एक joint digital currency sandbox शुरू करना, जिससे मुद्रा रूपांतरण की लागत घटे। यदि ये योजनाएँ सफल रही तो दुनिया देखेगी कि कैसे एक विकासशील देश ने ‘ईंट‑ईंट लगाकर’ वैश्विक व्यवस्था को नया आकार दिया है — न केवल अपनी मांगों को पूरा करने के लिए बल्कि सबके लिए एक अधिक समावेशी, तेज़ और सस्ता वित्तीय तंत्र स्थापित करके।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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