लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के ड्यूटी पैटर्न पर उठाए सवाल

10/9/2026, 10:21:30 pm
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के ड्यूटी पैटर्न पर उठाए सवाल
Original publisher image
दिल्ली पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के ड्यूटी पैटर्न पर आपत्ति जताई है। पुलिस का कहना है कि मौजूदा रोस्टर से सुरक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हो सकती है। पांच प्रमुख बलों – CRPF, BSF, ITBP, CISF और SSB – ने इस संबंध में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। इन बलों का दावा है कि ड्यूटी का नया पैटर्न उनके जवानों को लंबे समय तक बिना आराम के तैनात रखता है। इससे थकान बढ़ने और ऑपरेशनल क्षमता घटने का खतरा है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिखर सम्मेलन के लिए विशेष सुरक्षा योजना तैयार की गई थी। उस योजना में अर्धसैनिक बलों को निश्चित शिफ्ट में लगाया गया था। लेकिन नए पैटर्न के तहत शिफ्ट की अवधि बढ़ा दी गई और ब्रेक का समय कम कर दिया गया। बलों के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह बदलाव बिना उनसे सलाह लिए किया गया। उन्होंने मांग की है कि पुराना रोस्टर फिर से लागू किया जाए। गृह मंत्रालय ने मामले का संज्ञान लिया है और एक समीक्षा समिति गठित की है। समिति अगले सप्ताह अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। तब तक मौजूदा ड्यूटी व्यवस्था जारी रहेगी। सम्मेलन 10 से 12 सितंबर तक नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होगा। पिछले वर्ष भी इसी तरह के ड्यूटी पैटर्न को लेकर विवाद हुआ था। तब दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के बीच समन्वय बैठक बुलाई गई थी। इस बार भी पुलिस आयुक्त ने कहा कि बिना संयुक्त अभ्यास के सुरक्षा में दरार आ सकती है। अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों ने भी चेतावनी दी कि लंबी शिफ्ट से जवानों की सतर्कता प्रभावित होगी। विदेशी प्रतिनिधियों की सुरक्षा को देखते हुए गृह मंत्रालय ने त्वरित समाधान का आश्वासन दिया है। पुलिस आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि अर्धसैनिक बलों की तैनाती से पहले संयुक्त अभ्यास अनिवार्य है। केंद्रीय गृह सचिव ने कहा कि नए रोस्टर का मकसद संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। हालांकि बलों के प्रतिनिधि इस तर्क को मानने से इनकार करते हैं और पुराने शेड्यूल की मांग पर अड़े हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर समाधान न होने पर शिखर सम्मेलन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। अगले कुछ दिनों में दोनों पक्षों की बैठक तय की गई है ताकि सहमति बन सके। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित