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सीबीएसई 12वीं के नतीजों में गिरावट: आखिर इस बार क्यों कम रह गए पास होने वाले छात्र?

17/5/2026, 3:33:21 am
सीबीएसई 12वीं के नतीजों में गिरावट: आखिर इस बार क्यों कम रह गए पास होने वाले छात्र?
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नई दिल्ली: साल दर साल छात्रों के भविष्य की राह तय करने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं कक्षा के नतीजे इस बार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। पिछले कुछ सालों के मुकाबले इस बार परीक्षा पास करने वाले छात्रों का कुल प्रतिशत कम रहा है, जिसने अभिभावकों और छात्रों दोनों को चिंतित कर दिया है। सीबीएसई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 12वीं कक्षा में कुल 87.33% छात्र ही परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए हैं। यह पिछले साल के 92.71% के आंकड़े की तुलना में लगभग 5.38% की सीधी गिरावट है। यह दिखाता है कि इस बार पाठ्यक्रम और परीक्षा की कठोरता को पूरा करने में छात्रों को अधिक संघर्ष करना पड़ा है। हालांकि, लड़कियों ने एक बार फिर लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया है। इस साल 90.68% लड़कियां परीक्षा में सफल रहीं, जबकि लड़के 84.67% पर रुके। क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो त्रिवेंद्रम रीजन 98.83% पास प्रतिशत के साथ सबसे अव्वल रहा। वहीं, गुवाहाटी रीजन 79.49% के साथ सबसे निचले पायदान पर रहा। सीबीएसई के अधिकारियों की मानें तो इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारण माना जा रहा है कि कोविड-19 महामारी के बाद, बोर्ड अपनी परीक्षाओं को पहले की तरह सामान्य और सख्त स्वरुप में वापस ले आया है। महामारी के दौर में, छात्रों को राहत देने के लिए पाठ्यक्रम में कटौती की गई थी और कुछ विषयों के प्रश्नों की कठिनाई का स्तर भी कम किया गया था। अब जब पूरा पाठ्यक्रम लागू है और परीक्षाएँ वस्तुनिष्ठ (objective) और व्यक्तिनिष्ठ (subjective) दोनों तरह के प्रश्नों के साथ पहले जैसी हो रही हैं, तो छात्रों को तालमेल बिठाने में वक्त लग रहा है। एक अन्य महत्वपूर्ण कारक परीक्षाओं में 'निष्पक्षता' और 'कठोरता' पर बोर्ड का बढ़ता जोर है। पिछले कुछ सालों में, सीबीएसई ने प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने और मूल्यांकन प्रक्रिया को और मजबूत बनाने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं। जब परीक्षा प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी होती है, तो कभी-कभी उत्तीर्ण प्रतिशत में थोड़ी गिरावट स्वाभाविक है। यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि केवल वही छात्र पास हों जिन्होंने वास्तव में मेहनत की हो। इसके अलावा, इस साल 'अनिवार्य' विषयों के तहत अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के आंकड़ों में भी कमी आई है, जो परीक्षा की बढ़ती चुनौती का संकेत देता है। इन नतीजों पर आगे की समीक्षा और विश्लेषण से छात्रों को भविष्य की परीक्षाओं के लिए बेहतर तैयारी करने में मदद मिलेगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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