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चीन की ज़रूरतें उसे भारत के क़रीब खींच रहीं

13/9/2026, 9:32:18 am
चीन की ज़रूरतें उसे भारत के क़रीब खींच रहीं
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2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। दोनों तरफ से सैनिक तैनाती बढ़ी और व्यापार पर भी असर पड़ा। पिछले कुछ महीनों में हालात बदलने लगे हैं। चीन की अर्थव्यवस्था धीमी पड़ रही है और उसे बड़े भारतीय बाज़ार के साथ-साथ निवेश की भी ज़रूरत महसूस हो रही है। चीनी कंपनियां भारतीय टेक और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में फिर से दिलचस्पी दिखा रही हैं। भारत भी चीन के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है, मगर सीमा विवाद पर वह कोई समझौता नहीं करना चाहता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा है कि सीमा पर शांति बनी रहे तो ही आर्थिक सहयोग आगे बढ़ेगा। दोनों देशों ने सैन्य स्तर की वार्ता फिर से शुरू की है। ब्रिक्स, शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन और अन्य मंचों पर भी सहयोग बढ़ रहा है। सीमा पर डिसइंगेजमेंट के कदम उठाए गए हैं और हॉटस्पॉइंट पर गश्त कम हुई है। अमेरिका की इंडो‑पैसिफिक रणनीति और क्वाड जैसे गठबंधन चीन को भारत के साथ संतुलन बनाने पर मजबूर कर रहे हैं। चीन नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह पश्चिमी खेमे में चला जाए। नतीजा यह है कि तनाव कम हुआ है, व्यापार आंकड़े सुधर रहे हैं, लेकिन भरोसा अभी पूरी तरह कायम नहीं हुआ है। दोनों पक्ष सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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