लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
विश्व

चीन ने तेल बाज़ार का खेल पलटा: विशाल भंडार से आयात पर निर्भरता घटी

19/9/2026, 12:10:43 am
चीन ने तेल बाज़ार का खेल पलटा: विशाल भंडार से आयात पर निर्भरता घटी
Original publisher image
चीन ने कच्चे तेल का ऐसा भंडार खड़ा कर दिया है कि दुनिया का तेल बाज़ार अब पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकता। बीते कुछ सालों में चीन ने अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (एसपीआर) को तेज़ी से भरा है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक चीन के पास अब 1.2 अरब बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल जमा है। यह मात्रा उसकी करीब 90 दिन की खपत के बराबर बैठती है। पहले चीन अपनी ज़रूरत का 70 फ़ीसदी से ज़्यादा तेल आयात करता था। सप्लाई में ज़रा सी रुकावट आते ही कीमतें उछल जाती थीं। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। चीनी रिफाइनरियां भरे हुए टैंकों से माल निकालकर बाज़ार में उतार रही हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों पर दबाव बना हुआ है। ओपेक प्लस के उत्पादन कटौती के फ़ैसले भी अब उतने असरदार नहीं रहे। जब सऊदी अरब या रूस उत्पादन घटाते हैं, तो चीन अपने भंडार से तेल निकालकर कमी पूरी कर देता है। नतीजा यह कि कीमतें उस तेज़ी से नहीं चढ़तीं जैसी पहले चढ़ती थीं। विश्लेषकों का मानना है कि चीन की यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ भू-राजनीतिक बढ़त भी देती है। ताइवान जलडमरूमध्य या दक्षिण चीन सागर में तनाव बढ़ने पर भी चीन महीनों तक अपनी अर्थव्यवस्था चला सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञ चेताते हैं कि इतना बड़ा भंडार रखना खर्चीला है। टैंकों का रखरखाव, बीमा और ब्याज लागत जोड़ें तो सालाना अरबों डॉलर खर्च होते हैं। फिर भी बीजिंग इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का बीमा मानता है। भारत के लिए सबक साफ है। अपनी रणनीतिक भंडार क्षमता बढ़ानी होगी। अभी भारत के पास महज़ 9-10 दिन का कवर है। अगर चीन की राह पर चलना है तो विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर के अलावा नए ठिकाने तलाशने होंगे।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

संबंधित