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चीनी की जमाखोरी पर सख्ती, दाम 70-80 रुपये पहुंचे, यूपी समेत कई राज्यों में निगरानी

22/8/2026, 11:00:24 pm
चीनी की जमाखोरी पर सख्ती, दाम 70-80 रुपये पहुंचे, यूपी समेत कई राज्यों में निगरानी
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देश भर में चीनी की किल्लत बढ़ने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने जमाखोरी पर सख्ती शुरू कर दी है। पिछले कुछ हफ्तों में खुदरा बाजार में चीनी का भाव 70 रुपये से लेकर 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इस तेजी से आम उपभोक्ता पर बोझ बढ़ा है और त्योहारी सीजन में मांग और बढ़ने की आशंका है। उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे थोक और खुदरा बाजारों में स्टॉक की जांच करें और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसी तरह महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात में भी निगरानी टीमें गठित की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए गोदामों और मिलों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। केंद्र ने भी आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत राज्यों को अधिकार दिए हैं कि वे मूल्य नियंत्रण और जमाखोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं। वाणिज्य मंत्रालय ने चीनी मिलों से उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाने का आग्रह किया है। मिल मालिकों का कहना है कि गन्ने की कम आवक और मौसम की अनिश्चितता के कारण उत्पादन में कमी आई है। उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि सरकार मूल्य सीमा तय करे और कालाबाजारी पर अंकुश लगाए। विशेषज्ञों का मानना है कि निगरानी बढ़ने से बाजार में पारदर्शिता आएगी और कीमतों में स्थिरता लौटेगी। साथ ही किसानों को उचित मूल्य मिलने से गन्ने की खेती में रुचि बढ़ेगी। अब तक की कार्रवाई से कुछ बाजारों में कीमतें मामूली रूप से गिरी हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने पर फिर से उछाल आ सकता है। सरकार ने कहा है कि वह स्थिति पर नजर रखेगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाएगी। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अधिकृत दुकानों से ही चीनी खरीदें और जमाखोरी की सूचना स्थानीय प्रशासन को दें। राज्य स्तर पर भी कई कदम उठाए गए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे हर हफ्ते स्टॉक रिपोर्ट सौंपें। महाराष्ट्र में चीनी मिलों को उत्पादन लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रोत्साहन राशि घोषित की गई है। कर्नाटक ने अपनी सहकारी समितियों के माध्यम से सीधी बिक्री शुरू की है ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो। केंद्र सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से चीनी आयात की संभावना तलाशना शुरू कर दिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों से बातचीत की है ताकि घरेलू आपूर्ति में कमी न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आयात समय पर होता है तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं। उपभोक्ता अधिकार संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वह मूल्य निगरानी पोर्टल को जनता के लिए खुला करे। इससे आम नागरिक वास्तविक समय में कीमत देख सकेंगे और शिकायत दर्ज कर सकेंगे। सरकार ने इस दिशा में कदम उठाने का आश्वासन दिया है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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