लाइव
टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।टाइम्स न्यूज़ नाउ में आपका स्वागत है — सिर्फ सच।ऑटो-पब्लिशिंग इंजन तैयार है। एडमिन → ऑटोमैटिक से कॉन्फ़िगर करें।
भारत

चुनावी राज्यों में जल्दी जनगणना पर कांग्रेस का सवाल: राजनीतिक गणना का आरोप

5/9/2026, 4:49:23 am
चुनावी राज्यों में जल्दी जनगणना पर कांग्रेस का सवाल: राजनीतिक गणना का आरोप
Original publisher image
कांग्रेस ने चुनावी राज्यों में जल्दी जनगणना कराने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि इस कदम के पीछे कुटिल राजनीतिक हिसाब‑किताब काम कर रहा है। पार्टी प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि जनगणना का समय बदलने से मतदाता सूची और आरक्षण के आंकड़े प्रभावित होंगे। इससे सत्ताधारी दल को चुनावी लाभ मिल सकता है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि केंद्र ने बिना संसदीय चर्चा के यह निर्णय लिया। पार्टी ने मांग की कि जनगणना की तारीख पहले की तरह 2021 की जगह 2026 में ही रखी जाए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केंद्र को पत्र लिखकर जल्दी जनगणना रोकने की अपील की है। सरकार की ओर से कहा गया है कि जनगणना का कार्यक्रम तकनीकी कारणों से आगे बढ़ाया गया है। अधिकारियों ने दावा किया कि डेटा संग्रह में देरी से योजनाओं पर असर पड़ता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना का समय राजनीतिक रूप से संवेदनशील होता है। चुनावी राज्यों में आबादी के आंकड़े बदलने से सीटों का परिसीमन प्रभावित हो सकता है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि पिछली जनगणना के आंकड़े अभी तक पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हुए हैं। ऐसे में नई जनगणना की जल्दबाज़ी संदेह पैदा करती है। पार्टी ने संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर बहस की मांग की है। साथ ही चुनाव आयोग से भी निष्पक्ष जांच की अपील की गई है। भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया है। पार्टी का कहना है कि जनगणना का कार्यक्रम राष्ट्रीय हित में तय किया गया है और इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी जनगणना की समय‑सीमा पर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि जनगणना संवैधानिक दायित्व है और इसे राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाना चाहिए। जनता के बीच भी इस फैसले को लेकर मिली‑जुली प्रतिक्रिया है। कुछ नागरिक मानते हैं कि जल्दी जनगणना से विकास योजनाओं को सही दिशा मिलेगी, जबकि अन्य इसे चुनावी हथकंडा मानते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनगणना के आंकड़े सीधे तौर पर संसदीय सीटों के परिसीमन को प्रभावित करते हैं। इसलिए किसी भी बदलाव को पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने आगे कहा कि वह इस मुद्दे को जनता के सामने ले जाएगी और आगामी चुनावों में इसे प्रमुख मुद्दा बनाएगी। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से जनसभाओं में इस बात को उठाने का निर्देश दिया है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

संबंधित