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कांग्रेस में ब्रिक्स पर दो राय: चिदंबरम ने पूछा लाभ, थरूर ने बताया महत्व

11/9/2026, 6:01:45 am
कांग्रेस में ब्रिक्स पर दो राय: चिदंबरम ने पूछा लाभ, थरूर ने बताया महत्व
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कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं – पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम और पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर – ने हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर सार्वजनिक रूप से अलग‑अलग राय रखी। चिदंबरम ने पूछा कि इस मंच से भारत को ठोस क्या मिला, जबकि थरूर ने बताया कि ब्रिक्स देश के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है। चिदंबरम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ब्रिक्स में भारत की भागीदारी अब तक केवल बयानबाज़ी तक सीमित रही है। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक सहयोग के नाम पर कोई बड़ा निवेश या तकनीक हस्तांतरण नहीं हुआ। उन्होंने सरकार से स्पष्ट पूछा कि पिछले पांच वर्षों में ब्रिक्स के माध्यम से भारत को कितना विदेशी निवेश मिला और कितने नए व्यापार समझौते हुए। पूर्व वित्त मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि ब्रिक्स के नए विकास बैंक (NDB) से भारत को अब तक केवल छोटे कर्ज़ मिले हैं, जो बड़ी परियोजनाओं के लिए काफी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत को वास्तविक लाभ चाहिए तो सरकार को ब्रिक्स में अपनी बात मजबूती से रखनी होगी, न कि केवल सदस्य बने रहना। दूसरी ओर, शशि थरूर ने एक अखबार के कॉलम में लिखा कि ब्रिक्स भारत को बहुध्रुवीय विश्व में अपनी आवाज़ उठाने का एक मंच देता है। उन्होंने बताया कि चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ नियमित संवाद से भारत अपनी सुरक्षा, ऊर्जा और जलवायु नीति पर चर्चा कर सकता है। थरूर ने NDB के माध्यम से मिले कर्ज़ को एक सकारात्मक कदम बताया और कहा कि इससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति मिली है। थरूर ने यह भी कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य सहयोग और आतंकवाद विरोधी उपायों पर साझा पहल की घोषणा की है। उनके अनुसार ये पहल भारत के दीर्घकालिक हित में हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कांग्रेस के अंदर इस मतभेद से पार्टी की विदेश नीति पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता चिदंबरम के सवाल को वाजिब मानते हैं और कहते हैं कि सरकार को ब्रिक्स से ठोस परिणाम दिखाने चाहिए। वहीं दूसरे तबके का मानना है कि थरूर का नज़रिया अधिक व्यावहारिक है और ब्रिक्स में बने रहना भारत के लिए लाभकारी है। पार्टी नेतृत्व ने अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ब्रिक्स पर मतभेद केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है; सत्ताधारी दल भी इस मंच के लाभ‑हानि का लगातार आकलन करता रहता है। संसद के आगामी सत्र में ब्रिक्स की भूमिका पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों पक्षों के तर्क सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि भारत सरकार ब्रिक्स से कितना लाभ उठा पाती है और विपक्ष की आलोचना का जवाब कैसे देती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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