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सीआरपीएफ ने संभाली 21 सेना चौकियाँ, आतंकवाद विरोधी अभियान का नेतृत्व करेगी

6/9/2026, 11:07:41 pm
सीआरपीएफ ने संभाली 21 सेना चौकियाँ, आतंकवाद विरोधी अभियान का नेतृत्व करेगी
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सीआरपीएफ को जम्मू‑कश्मीर में सेना की 21 चौकियों की कमान सौंपी गई है। गृह मंत्रालय के आदेश पर यह तैनाती सोमवार से प्रभावी हो गई। अब सीआरपीएफ के जवान इन स्थानों पर आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व करेंगे। सेना के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए संयुक्त कमान केंद्र स्थापित किया गया है। इस केंद्र में दोनों बलों के वरिष्ठ अधिकारी नियमित बैठकें करेंगे। खुफिया सूचनाओं का त्वरित आदान‑प्रदान सुनिश्चित होगा। अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था से आतंकियों के ठिकानों पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। सीआरपीएफ के महानिदेशक ने कहा कि बल पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सेना की भूमिका सीमा सुरक्षा तक सीमित रहेगी। स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां भी अभियान में सहयोग देंगी। पिछले कुछ महीनों में आतंकी घटनाओं में वृद्धि देखी गई थी। नई तैनाती को सुरक्षा विशेषज्ञों ने सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि, कुछ विश्लेषक संसाधनों के बंटवारे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि दोहरी कमान से ऑपरेशनल दक्षता प्रभावित हो सकती है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि संसाधन आवंटन पारदर्शी रहेगा। सीआरपीएफ की नई जिम्मेदारी में घाटी के संवेदनशील इलाके भी शामिल हैं। इन इलाकों में पहले सेना की टुकड़ियां तैनात थीं। अब सीआरपीएफ के जवान वहां गश्त और तलाशी अभियान चलाएंगे। सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर रियल‑टाइम सूचना साझा होगी। इससे ऑपरेशन की गति और सटीकता बढ़ेगी। सरकार का दावा है कि यह कदम आतंकवाद की कमर तोड़ने में मदद करेगा। आने वाले हफ्तों में ऑपरेशनल रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी। नागरिकों से भी सहयोग की अपील की गई है। पहले इन चौकियों पर सेना की नियमित टुकड़ियां तैनात थीं। लेकिन आतंकी हमलों की बढ़ती संख्या ने रणनीति बदलने पर मजबूर किया। गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ की विशेषज्ञता को देखते हुए यह फैसला लिया। सीआरपीएफ के पास पहले से ही आतंकवाद विरोधी अभियानों का लंबा अनुभव है। बल ने पंजाब, उत्तर‑पूर्व और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सफल ऑपरेशन चलाए हैं। इस अनुभव का लाभ जम्मू‑कश्मीर में भी मिलेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सीआरपीएफ की तैनाती से स्थानीय आबादी का भरोसा भी बढ़ेगा। बल के जवान स्थानीय भाषा और संस्कृति से परिचित हैं। इससे खुफिया नेटवर्क मजबूत होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सीआरपीएफ की भूमिका केवल आतंकवाद विरोधी तक सीमित रहेगी। सीमा सुरक्षा और अन्य रणनीतिक कार्य सेना के पास रहेंगे। इस विभाजन से दोनों बलों की क्षमता अधिकतम होगी। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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