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क्यूबा में अमेरिकी प्रतिबंधों का असर: एक और ब्लैकआउट से लाखों अंधेरे में

20/9/2026, 4:32:36 am
क्यूबा में अमेरिकी प्रतिबंधों का असर: एक और ब्लैकआउट से लाखों अंधेरे में
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अमेरिका ने क्यूबा पर कई दशक से आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिसका सीधा असर ईंधन आयात पर पड़ता है। इन प्रतिबंधों के कारण ईंधन की आपूर्ति लगातार घटती रही है। बिजली संयंत्रों को चलाने के लिए ज़रूरी डीज़ल और भारी तेल समय पर नहीं मिल पाता, जिससे उत्पादन क्षमता आधी रह गई है। नतीजा यह है कि पूरे देश में बिजली कटौती आम बात हो गई है। पिछले सप्ताह एक और बड़ा ब्लैकआउट हुआ, जब मुख्य ग्रिड पूरी तरह ठप हो गया। राजधानी हवाना सहित कई प्रांतों में रात भर बिजली गायब रही। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लगभग एक करोड़ बीस लाख लोग अंधेरे में रहे। बिजली न होने से पानी की सप्लाई भी ठप हो गई, क्योंकि पंप चलाने के लिए बिजली चाहिए। अस्पतालों में जनरेटर पर निर्भरता बढ़ गई। कई छोटे अस्पतालों में जनरेटर खराब होने से मरीजों को मुश्किल हुई, ऑपरेशन टालने पड़े। सार्वजनिक परिवहन बंद रहा, दुकानें जल्दी बंद हुईं और रोज़मर्रा का सामान खरीदना मुश्किल हो गया। लोगों ने मोमबत्ती, लालटेन और बैटरी का सहारा लिया, जिससे घरेलू खर्च बढ़ गया। क्यूबा सरकार ने आपातकालीन योजना शुरू की। ईंधन का राशन बांटा गया, बिजली की खपत कम करने के लिए उद्योगों को बंद रखने का आदेश दिया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवीय सहायता की अपील की गई, लेकिन प्रतिबंधों के कारण मदद पहुंचने में देरी हो रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रतिबंधों के चलते क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है। विदेशी मुद्रा की कमी, खाद्य संकट और दवाओं की किल्लत पहले से ही मौजूद हैं। बिजली संकट इन समस्याओं को और गहरा कर रहा है, जिससे जनजीवन और कठिन हो गया है। आने वाले महीनों में अगर ईंधन की आपूर्ति नहीं सुधरी तो ब्लैकआउट की आवृत्ति बढ़ सकती है। सरकार और नागरिक दोनों ही दीर्घकालिक समाधान की तलाश में हैं, लेकिन प्रतिबंधों के रहते विकल्प सीमित हैं। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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