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क्यूबा ने अमेरिकी टैरिफ नीति को गलत बताया, भारत से दोस्ती कायम

19/9/2026, 7:45:39 pm
क्यूबा ने अमेरिकी टैरिफ नीति को गलत बताया, भारत से दोस्ती कायम
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क्यूबा ने अमेरिका की नई टैरिफ नीति को गलत बताया है। हवाना में भारतीय दूतावास के सामने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्यूबा के विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के फैसले से वैश्विक व्यापार को नुकसान होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत के साथ क्यूबा की दोस्ती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों देश लंबे समय से सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखते हैं। क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्स एन एगुइलेरा ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका की संरक्षणवादी नीति से विकासशील देशों को अधिक नुकसान होगा। उन्होंने आगे बताया कि क्यूबा भारत के साथ व्यापार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। भारत ने क्यूबा के इस रुख का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंध और मजबूत होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की टैरिफ बढ़ोतरी से विश्व बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी। क्यूबा जैसे छोटे देशों के लिए यह आर्थिक दबाव और बड़ा होगा। इस बीच, क्यूबा ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अमेरिकी नीति का विरोध दर्ज कराया है। संयुक्त राष्ट्र में क्यूबा के प्रतिनिधि ने कहा कि एकपक्षीय टैरिफ लगाना विश्व व्यापार संगठन के नियमों के विरुद्ध है। भारत और क्यूबा के बीच हाल ही में हुए द्विपक्षीय समझौते से दोनों देशों के बीच निवेश की नई संभावनाएं खुली हैं। आने वाले महीनों में दोनों पक्ष उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित करेंगे ताकि सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की जा सके। अमेरिका ने इस साल स्टील, एल्युमिनियम और कृषि उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाए हैं, जिससे कई विकासशील देशों के निर्यात प्रभावित हुए हैं। क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण कमजोर है, और नई टैरिफ नीति से उसकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। भारत ने क्यूबा को चिकित्सा उपकरण, दवाइयां और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहायता दी है, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ा है। दोनों देशों के विदेश मंत्री ने पिछले साल हवाना में मिलकर व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दिया गया था। अब क्यूबा का यह बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देता है कि छोटे देश भी बड़ी शक्तियों की नीतियों का विरोध कर सकते हैं और अपने साझेदारों के साथ मजबूत संबंध बनाए रख सकते हैं। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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