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बिहार से मुंबई: दीपाली सहाय का गायकी का सफ़र

7/9/2026, 1:19:22 pm
बिहार से मुंबई: दीपाली सहाय का गायकी का सफ़र
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बिहार के एक छोटे शहर से निकलकर मुंबई की चकाचौंध में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरना आसान नहीं होता। दीपाली सहाय ने यह कर दिखाया। उनके कई गाने आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं — ख़ासकर 'रात भर याद आती रही', जो कुछ साल पहले आया था और खूब सुना गया। दीपाली का बचपन बिहार में बीता। पढ़ाई में तेज़ थीं, सो घरवालों ने आईपीएस अफ़सर बनने का सपना देखना शुरू कर दिया। दीपाली ने भी तैयारी शुरू कर दी। लेकिन दिल कहीं और अटका था — संगीत में। स्कूल-कॉलेज के कार्यक्रमों में गातीं, तारीफ़ मिलती, पर करियर के तौर पर गायकी चुनना तब दूर की कौड़ी लगती थी। एक रोज़ लगा कि यूपीएससी की किताबों से ज़्यादा क़रीब गिटार और हारमोनियम लगते हैं। परिवार को मनाना मुश्किल था। पिता सरकारी नौकरी में थे, माँ गृहिणी। दोनों चाहते थे बेटी अफ़सर बने। दीपाली ने समझाया: "एक बार कोशिश करने दो, नाकाम रही तो फिर पढ़ाई पकड़ लूँगी।" घरवाले मान गए, शर्त रखी — दो साल का वक़्त। मुंबई पहुँची तो संघर्ष का असली मतलब समझ आया। छोटे स्टूडियो, कम बजट के प्रोजेक्ट, रिजेक्शन — सब देखा। मगर हार नहीं मानी। स्थानीय बैंड्स के साथ गाया, जिंगल्स रिकॉर्ड किए, लाइव शो किए। धीरे-धीरे पहचान बनी। फिर 'रात भर याद आती रही' आया और सब बदल गया। गाना यूट्यूब पर लाखों बार सुना गया, रेडियो स्टेशनों ने बजाया, प्लेलिस्ट में शामिल हुआ। आज दीपाली के पास कई प्रोजेक्ट हैं। वे कहती हैं: "आईपीएस न बन सकी, इसका अफ़सोस नहीं। गायकी ने मुझे वो आज़ादी दी जो वर्दी शायद न दे पाती।" उनका मानना है कि सपने बदल सकते हैं, बशर्ते आप मेहनत से पीछे न हटें। बिहार की उस लड़की की कहानी अब छोटे कस्बों के उन तमाम युवाओं के लिए मिसाल है जो बड़े शहर आकर कुछ करना चाहते हैं — पर डरते हैं। दीपाली कहती हैं: "डर लगे तो भी चलते रहो। रास्ता निकलता है।"
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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