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दिल्ली में फिर निर्भया जैसी घटना, 2012 के बाद महिला अपराध में कितना बदलाव

31/8/2026, 12:34:12 am
दिल्ली में फिर निर्भया जैसी घटना, 2012 के बाद महिला अपराध में कितना बदलाव
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दिल्ली के एक बाहरी इलाके में शुक्रवार रात एक युवती के साथ बलात्कार और हत्या की वारदात सामने आई। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज किया और तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। घटना ने 2012 के निर्भया कांड की याद ताजा कर दी, जब एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस घटना के बाद संसद ने कड़े कानून बनाए, फास्ट‑ट्रैक अदालतें स्थापित कीं और पुलिस में महिला हेल्पलाइन शुरू की। फिर भी, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर 2012 के मुकाबले केवल मामूली घटी है। 2023 में राजधानी में 13,500 से अधिक महिला अपराध दर्ज हुए, जिनमें बलात्कार, छेड़छाड़ और घरेलू हिंसा शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून तो मजबूत हुए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर पुलिस की संवेदनशीलता, त्वरित जांच और पीड़ितों को सहायता देने की व्यवस्था अब भी कमजोर है। कई मामलों में शिकायत दर्ज होने के बाद भी जांच महीनों तक लटकी रहती है। सामाजिक कार्यकर्ता मांग कर रहे हैं कि सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कवरेज बढ़ाया जाए, रात की पेट्रोलिंग तेज की जाए और महिला थानों की संख्या बढ़ाई जाए। साथ ही स्कूलों और कॉलेजों में जेंडर संवेदनशीलता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएं। दिल्ली पुलिस ने हाल ही में “सुरक्षित शहर” अभियान शुरू किया है, जिसमें मोबाइल ऐप के जरिए तत्काल सहायता की सुविधा दी गई है। हालांकि, नागरिकों का कहना है कि ऐप की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंची है और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय अब भी लंबा है। सरकार ने घोषणा की है कि अगले वित्त वर्ष में महिला सुरक्षा के लिए 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया जाएगा। देखना होगा कि यह राशि ज़मीन पर कितनी कारगर साबित होती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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