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चम्पारण के किसान मंजय ने ड्रैगन फ्रूट से 25 साल तक कमाई की

17/9/2026, 5:42:44 am
चम्पारण के किसान मंजय ने ड्रैगन फ्रूट से 25 साल तक कमाई की
चम्पारण जिले के बगहा प्रखंड में रहने वाले किसान मंजय कुमार ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया है। उन्होंने 2018 में एक एकड़ भूमि पर ड्रैगन फ्रूट के पौधे रोपे और तब से हर साल फल की अच्छी पैदावार मिल रही है। एक बार पौधा लगाने के बाद यह 25 वर्ष तक फल देता रहता है, जिससे किसान को बार‑बार बुवाई की जरूरत नहीं पड़ती। बाजार में ड्रैगन फ्रूट की मांग तेजी से बढ़ी है और दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में इसकी कीमत 150‑200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है। मंजय बताते हैं कि पहले वे धान और गेहूं उगाते थे, लेकिन प्रति एकड़ केवल 30‑40 हज़ार रुपये की आमदनी होती थी। अब ड्रैगन फ्रूट से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 3‑4 लाख रुपये सालाना मिल रहे हैं, जो उनकी पारिवारिक आय को दोगुना कर चुका है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेश सिंह के अनुसार ड्रैगन फ्रूट की जड़ें गहरी होती हैं, जिससे यह सूखे और कम पानी वाले इलाकों में भी अच्छी तरह बढ़ता है। बिहार सरकार की ‘बागवानी विकास योजना’ के तहत मंजय को 50 % सब्सिडी और मुफ्त प्रशिक्षण मिला, जिससे प्रारंभिक लागत काफी कम रही। इस सहायता के बाद आसपास के गांवों के 30 से अधिक किसानों ने भी ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर दी है। मंजय अब युवाओं को सलाह देते हैं कि वे परंपरागत फसलों के साथ‑साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को भी अपनाएं। वे कहते हैं, "बाजार की मांग समझना और नई तकनीक अपनाना ही खेती को लाभदायक बनाता है।" इस तरह एक बार की मेहनत और सही मार्गदर्शन से किसान लंबे समय तक स्थिर आमदनी हासिल कर सकते हैं। मंजय अपने उत्पाद को स्थानीय मंडी के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं, जिससे बिचौलियों का कमीशन बचता है। उन्होंने पिछले साल 12 टन ड्रैगन फ्रूट का निर्यात बांग्लादेश और नेपाल को किया, जिससे विदेशी मुद्रा भी अर्जित हुई। कृषि विभाग के अधिकारी कहते हैं कि ड्रैगन फ्रूट की खेती जलवायु परिवर्तन के दौर में भी सुरक्षित विकल्प साबित हो रही है। आने वाले वर्षों में मंजय की योजना 5 एकड़ और विस्तार करने की है, ताकि पूरे क्षेत्र को ड्रैगन फ्रूट का हब बनाया जा सके। समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Champaran (Hindi)

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