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कांगो में इबोला का कहर जारी, मई से 3000 से अधिक मौतें

2/9/2026, 8:35:17 pm
कांगो में इबोला का कहर जारी, मई से 3000 से अधिक मौतें
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कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला वायरस का प्रकोप मई से जारी है और हाल में मौतों की संख्या तीन हज़ार के पार चली गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के दैनिक बुलेटिन के अनुसार हर दिन औसतन पचास से साठ नए मामले दर्ज किए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित पूर्वी प्रांत हैं जहाँ आबादी घनी है और स्वास्थ्य सुविधाएँ सीमित हैं। इबोला गंभीर रक्तस्रावी बुखार पैदा करता है; लक्षणों में अचानक तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त और रक्तस्त्राव शामिल हैं। वायरस इम्यून सिस्टम को कमजोर करके रोगी की हालत तेज़ी से बिगड़ने का कारण बनता है। रोगी को अक्सर गहरे अलग‑थलग wards में रखा जाता है ताकि संक्रमण फैलने से रोका जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्थानीय टीमें रिंग टीकाकरण चल रही हैं, जिससे संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों को एबोला वैक्सीन दी जाती है। इस रणनीति का लक्ष्य संक्रमण की chain को तोड़ना है। साथ ही, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी दवाएँ जैसे इबोमा और रेग्नेविबा सीमित मात्रा में इस्तेमाल की जा रही हैं; इन दवाओं ने कुछ मरीज़ों में सुधार दिखाया है। लेकिन संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा की कमी, स्वास्थ्य केंद्रों की कमी और अफवाहों के कारण टीकाकरण और उपचार में बाधा आ रही है। कई गाँवों में लोग टीके को लेकर संदेह रखते हैं, सोचते हैं कि यह सरकारी साज़िश है। इससे टीकाकरण दलों को गांव में प्रवेश करने में मुश्किल होती है। स्थानीय नेता और धर्मगुरु समुदायों से बात करके भरोसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे सार्वजनिक सभाओं में बीमारी के बारे में सही जानकारी देते हैं और टीके की सुरक्षा पर जोर देते हैं। कुछ जगहों पर ये प्रयास रंग लाए हैं और टीकाकरण दर में मामूली वृद्धि देखी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती पहचान और तुरंत इलाज मिलने से मृत्यु दर को काफी कम किया जा सकता है। यदि मरीज़ को लक्षण दिखने पर तुरंत एंटीवायरल दवाएँ और समर्थन चिकित्सा मिल जाए तो जीवन बचाने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, दवाओं की कमी, परिवहन की समस्या और कर्मचारियों की कमी के कारण कई मरीज़ों को समय पर मदद नहीं मिल पाती। अंतरराष्ट्रीय donor agencies से वित्तीय मदद और तकनीकी समर्थन की मांग बढ़ रही है। यूएन और विभिन्न गैर सरकारी संगठन फंड जुटा रहे हैं ताकि कोल्ड चेन बनाई जा सके और टीके को सुरक्षित रूप से पहुंचाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टीका और दवाओं की सप्लाई सुचारू रूप से हो तो फैलाव पर रोक लगाई जा सकती है। फिलहाल, समुदायों में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि लोग लक्षण पहचान कर सकें और जल्दी से स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच सकें। रेडियो, मोबाइल वैन और स्कूलों में पोस्टर लगाए जा रहे हैं। आशा है कि 공동 प्रयास से इस महामारी पर काबू पाया जा सके।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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