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फरक्का जल संधि: 2026 के बाद बिहार को कितना पानी मिलेगा?

13/9/2026, 12:30:01 am
फरक्का जल संधि: 2026 के बाद बिहार को कितना पानी मिलेगा?
फरक्का जल संधि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई थी। इसका मकसद गंगा के पानी का बंटवारा तय करना था ताकि दोनों देशों को न्यूनतम प्रवाह मिले। संधि में हर पांच साल पर समीक्षा का प्रावधान रखा गया है। अगली समीक्षा 2026 में होनी है। बिहार सरकार, किसान संगठन और जल विशेषज्ञ चिंतित हैं कि अगर नए समझौते में बांग्लादेश का हिस्सा बढ़ा दिया गया तो बिहार को मिलने वाला पानी कम हो सकता है। बिहार की अर्थव्यवस्था गंगा पर निर्भर है – सिंचाई, पेयजल, मत्स्य पालन और नाविक परिवहन सभी इसी नदी से चलते हैं। पानी की कमी होने पर खरीफ और रबी फसलों की पैदावार घट सकती है, भूजल स्तर गिर सकता है और बाढ़ नियंत्रण में भी दिक्कत आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों को 2026 से पहले ही बातचीत शुरू कर देनी चाहिए ताकि अनिश्चितता न रहे। कुछ नीति‑निर्माता मानते हैं कि मौजूदा संधि में पर्याप्त लचीलापन है और नवीकरण के दौरान केवल छोटे सुधारों की जरूरत होगी। फिर भी, बिहार के जल संसाधन विभाग ने केंद्र से मांग की है कि राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नया फॉर्मूला तैयार किया जाए। सरल शब्दों में, फरक्का जल संधि का भविष्य बिहार के लाखों किसानों और नागरिकों की जिंदगी पर सीधा असर डालेगा। इसलिए वैज्ञानिक आंकड़ों, स्थानीय हितधारकों और कूटनीतिक पहल को मिलाकर समय पर ठोस फैसला लेना जरूरी है। समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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