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फरक्का जल संधि से बिहार की हकमारी, नवीनीकरण का विरोध

8/9/2026, 1:48:58 pm
फरक्का जल संधि से बिहार की हकमारी, नवीनीकरण का विरोध
फरक्का जल संधि, जिसे 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा नदी के जल बंटवारे के लिए किया गया था,近年来 बीहारी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। संजय कुमार झा, जो राज्य के एक वरिष्ठ नेता हैं, ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह संधि बिहार के जल अधिकारों की उपेक्षा करती है और राज्य के किसानों तथा नागरिकों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। उन्होंने तर्क दिया कि फरakk barrage के माध्यम से बांग्लादेश को दिया जाने वाला पानी का हिस्सा बिहार की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्धारित नहीं किया गया है।その結果、 राज्य के उत्तर भाग में सिंचाई के लिए उपलब्ध जल की मात्रा घटती जा रही है, जिससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। झा ने कहा कि यदि इस संधि का नवीनीकरण किया जाता है तो बिहार की पानी की कमी और बढ़ जाएगी, जिससे ग्रामीण आजीविका पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। झा ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह बिहार के प्रतिनिधियों के साथ एक नई बातचीत शुरू करे, जिसमें राज्य की वास्तविक जल आवश्यकताओं को आधार बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कोई नया समझौता इस प्रकार होना चाहिए कि बिहार को उचित हिस्सा मिले और बांग्लादेश की भी जरूरतें पूरी हों। उन्होंने कहा कि केवल एकतरफा concession देने से न केवल बिहार को नुकसान होगा बल्कि राष्ट्रीय जल सुरक्षा पर भी सवाल उठेंगे। इस मुद्दे पर विभिन्न किसान संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है और राज्यव्यापी प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि पानी के बंटवारे के किसी भी समझौते में पारदर्शिता लाई जाए और बिहार की आवाज को अनसुना न किया जाए। संजय कुमार झा का बयान इस बहस को नया मोड़ देते हुए नीति निर्माताओं पर दबाव बढ़ा रहा है।
समाचार स्रोत: Google News — Bihar (Hindi)

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