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भारत

बाबा बागेश्वर पर FIR: कांग्रेस‑भाजपा की असामान्य एकता

8/9/2026, 9:09:24 pm
बाबा बागेश्वर पर FIR: कांग्रेस‑भाजपा की असामान्य एकता
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बाबा बागेश्वर के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी ने राष्ट्रीय राजनीति में एक असामान्य एकता दिखलाई है। मध्य प्रदेश के चंदेरी जिले में स्थित उनके आश्रम पर मछली और मांस के सेवन पर प्रतिबंध लगाने वाले फरमान को लेकर स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई की है। इस आदेश के अनुसार, आश्रम के प्रवेश द्वार पर लगे बोर्ड में स्पष्ट लिखा गया कि शाकाहारी आहार ही अनुमति दिया जाएगा और मांस-मछली लाने वालों को प्रवेश नहीं मिलेगा। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के निर्देश सार्वजनिक स्थानों पर खाद्य पदार्थों पर मनमानी restriction लगाने के अधिकार से परे हैं, इसलिए धारा 188 और 294 के तहत मामला दर्ज किया गया। प्राथमिकी की जानकारी मिलते ही कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेताओं ने एकजुट होकर प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस के प्रवक्ता ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं को भी संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का पालन करना चाहिए, जबकि भाजपा के जिला अध्यक्ष ने इसे कानून की अवहेलना करार दिया। दोनों पक्षों ने मांग की कि जाँच निष्पक्ष हो और दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाए। स्थानीय निवासियों की राय बँटी हुई है। कुछ श्रद्धालु बाबा के निर्देश को आध्यात्मिक अनुशासन मानते हैं और मानते हैं कि मांस-मछली का सेवन उनके साधना के रास्ते में बाधा डालता है। दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता और पशु अधिकार समूहों का कहना है कि व्यक्तिगत खाद्य विकल्प पर प्रतिबंध लगाना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। मामले की सुनवाई जिला न्यायालय में आरंभ हो चुकी है और अभियोजन पक्ष ने आश्रम के सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए हैं। प्रतिकार पक्ष ने दलील दी कि फरमान केवल आंतरिक अनुशासन के लिए था और इसे सार्वजनिक जगह पर लागू नहीं किया गया। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने का समय दिया और अगली तारीख 15 अक्टूबर निर्धारित की है। इस घटना ने दिखाया है कि धार्मिक नेतृत्व और राज्य के बीच की सीमा कितनी संवेदनशील हो सकती है। जब भी किसी संस्था द्वारा खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश होती है, तो यह न केवल कानूनी सवाल खड़े करता है बल्कि सामाजिक सद्भाव पर भी असर डालता है। दोनों राष्ट्रीय दलों का एकजुट होना इस बात का संकेत है कि ऐसे मुद्दे पर राजनीतिक फायदे की बजाय संवैधानिक मूल्यों की रक्षा पर सहमति बन सकती है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत / News Source: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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