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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी का आरोप: 13-14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना बड़ा घोटाला

6/9/2026, 5:24:06 am
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी का आरोप: 13-14 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना बड़ा घोटाला
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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त सैयद यासीन कुरैशी ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) में 13 से 14 करोड़ नाम काटे जाने को 'बड़ा घोटाला' करार दिया है। शुक्रवार को एक निजी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में नाम हटाना सामान्य प्रक्रिया नहीं हो सकती। कुरैशी ने बताया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कुल 91 करोड़ मतदाता थे। 2024 आते-आते यह संख्या 97 करोड़ होनी चाहिए थी, लेकिन सूची 94 करोड़ पर अटक गई। यानी करीब तीन करोड़ नए मतदाता जुड़े ही नहीं। फिर अचानक 13-14 करोड़ नाम काट दिए गए। उन्होंने पूछा, "जब हर साल करीब दो करोड़ युवा 18 साल के होते हैं, तो मतदाता सूची घट कैसे सकती है?" पूर्व सीईसी ने आरोप लगाया कि नाम काटने का काम बिना जांच-पड़ताल के हुआ। बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) घर-घर गए ही नहीं। कई जगह एक ही परिवार के चार-पांच सदस्यों के नाम गायब मिले। कुरैशी के मुताबिक यह 2026 के चुनाव को प्रभावित करने की साजिश हो सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि काटे गए नामों की सूची सार्वजनिक की जाए। हर बूथ पर कैंप लगाकर दावे-आपत्तियां ली जाएं। साथ ही पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो। कुरैशी ने यह भी कहा कि आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया। इससे गरीब, बुजुर्ग और प्रवासी मजदूरों के नाम कटने का खतरा बढ़ा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें आधार को अनिवार्य नहीं बनाने की बात कही गई थी। चुनाव आयोग ने अभी तक इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। विपक्षी दलों ने कुरैशी की बात को हाथोंहाथ लेते हुए जांच की मांग तेज कर दी है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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