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यमन में ताज़ा झड़प: हूती‑सेना संघर्ष में 117 लोगों की मौत

7/9/2026, 3:39:19 am
यमन में ताज़ा झड़प: हूती‑सेना संघर्ष में 117 लोगों की मौत
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यमन में पिछले चार दिनों में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच लड़ाई फिर से तेज हो गई है। इस संघर्ष में अब तक 117 लोगों की मौत हो चुकी है और कई दर्जन घायल हुए हैं। लड़ाई मुख्य रूप से राजधानी सना के बाहरी इलाकों और मारिब प्रांत के तेल क्षेत्रों में हुई है। हूती लड़ाकों ने रॉकेट, तोपखाने और ड्रोन से हमले किए, जबकि सेना ने हवाई bombardment और लंबी दूरी की तोप से जवाब दिया। दोनों तरफ से नागरिक इलाकों में भी गोलीबारी हुई, जिससे स्कूल और अस्पताल नुकसान पहुंचे। संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल संघर्ष विराम की अपील की है और कहा है कि लड़ाई की वजह से अब तक 12,000 से ज्यादा लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं। स्थानीय अस्पतालों में दवाइयों और बेड की कमी है, जिससे गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज मुश्किल हो रहा है। क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है क्योंकि सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले बढ़ा दिए हैं। ईरान समर्थित हूती गुट ने अपने missile भंडार बढ़ाने का दावा किया है, जिससे क्षेत्रीय शक्तियों के बीच टकराव की आशंका गहराई गई है। भारत ने इस युद्ध में शांति बहाली के लिए वार्ता का समर्थन किया है और कहा है कि वह मानवीय मदद भेजने की तैयारी में है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह स्थिति पर नज़र रखे हुए है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करता है। मारे गए लोगों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं, जिससे संकट की गंभीरता और भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि कई घायलों को समय पर ऑक्सीजन और रक्त नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि आपूर्ति लाइनों कट गई हैं। स्थानीय स्वयंसेवकों ने अस्थाई शरणार्थी शिविर लगाए हैं, लेकिन वहां मूलभूत सुविधाओं की कमी है। आरएफई जैसे अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यदि लड़ाई जल्दी नहीं रुकी तो कुपोषण और चेचक जैसी बीमारियों का फैलाव बढ़ सकता है। बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण खाद्यान्न और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे आम नागरिकों की दैनिक जीवन वस्तुओं की कीमतें बढ़ गई हैं। आर्थिक प्रभाव पर ध्यान देते हुए, विश्व बैंक का अनुमान है कि यमन की अर्थव्यवस्था 2024 से संघर्ष तेज होने के बाद 15 प्रतिशत से अधिक सिकुड़ गई है, जिससे लाखों लोग गरीबी की ओर और बढ़ रहे हैं। देशी और विदेशी राजनयिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बुलाने की मांग कर रहे हैं ताकि दोनों पक्षों को युद्ध रोकने के लिए दबाव डाला जा सके। हालांकि, प्रतिद्वंद्वी क्षेत्रीय गठबंधन हथियारों की आपूर्ति जारी रखे हुए हैं, जिससे लड़ाई का तेजी से समाप्त होना अनिश्चित बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने 2025 के शांति समझौते को फिर से लागू करने की मांग की है, लेकिन हूती और सरकारी पक्ष दोनों ही इसकी शर्तों को मानने से इनकार कर रहे हैं, जिससे शांति की संभावना कमजोर दिख रही है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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