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गौहाटी हाईकोर्ट ने तलाक-ए-हसन को वैध माना, नए कानून में पंजीकरण अनिवार्य

10/9/2026, 10:05:43 pm
गौहाटी हाईकोर्ट ने तलाक-ए-हसन को वैध माना, नए कानून में पंजीकरण अनिवार्य
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गौहाटी हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में तलाक-ए-हसन को वैध ठहराया है। अदालत ने कहा कि यह तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मान्य है, लेकिन इसका पंजीकरण नए कानून के अनुसार कराना होगा। फैसला जस्टिस एस के शर्मा की बेंच ने सुनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तलाक-ए-हसन तीन चरणों में होता है और प्रत्येक चरण के बीच इंतज़ार की अवधि जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि पति-पत्नी को तलाक के बाद संपत्ति और गुजारा भत्ता के मामले नए अधिनियम के तहत सुलझाने होंगे। नया अधिनियम पिछले साल संसद से पारित हुआ था। इसका मकसद तलाक की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस अधिनियम के तहत पंजीकरण की व्यवस्था जल्द लागू करे। इस फैसले का असर असम के अलावा पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों पर भी पड़ सकता है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यह निर्णय मुस्लिम समुदाय में तलाक की प्रथा को कानूनी ढांचे में लाने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि कुछ संगठनों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नया कानून धार्मिक मामलों में दखल देता है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि कानून केवल प्रक्रियात्मक है और धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करेगा। अगली सुनवाई में अदालत पंजीकरण की समयसीमा और जुर्माने के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा करेगी। तब तक पक्षकारों को अपने दस्तावेज तैयार रखने की सलाह दी गई है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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