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ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 27 साल बाद भी नहीं भुला ओडिशा का वह खौफनाक मंजर

19/9/2026, 10:29:48 am
ग्राहम स्टेंस हत्याकांड: 27 साल बाद भी नहीं भुला ओडिशा का वह खौफनाक मंजर
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ओडिशा के मयूरभंज जिले का मनोहरपुर गांव। 22-23 जनवरी 1999 की रात। ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस अपने दो बेटों — 10 साल के फिलिप और 6 साल के टिमोथी — के साथ स्टेशन वैगन में सो रहे थे। आधी रात को सैकड़ों लोगों की भीड़ ने गाड़ी घेर ली। पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। तीनों ज़िंदा जल गए। भीड़ का नेतृत्व करने का दोषी बजरंग दल के कार्यकर्ता दारा सिंह को ठहराया गया। 2003 में निचली अदालत ने उसे फांसी की सज़ा सुनाई। 2005 में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दी। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उम्रकैद बरकरार रखी। आज 27 साल बाद बीबीसी हिंदी की ग्राउंड रिपोर्ट में गांव वाले खुलकर बोलते हैं। बुजुर्ग किसान रामचंद्र महतो कहते हैं, "उस रात की आग आज भी दिल में जलती है। हमने अपने बच्चों को बताया है — ऐसी नफरत कभी न पालना।" स्थानीय शिक्षक सुश्री अनिमा पटनायक बताती हैं, "स्कूल में हम बच्चों को स्टेंस परिवार की कहानी सुनाते हैं। सेवा, सहनशीलता और क्षमा — ग्राहम की पत्नी ग्लेडिस ने यही सिखाया। उन्होंने हत्यारों को माफ कर दिया था।" ग्लेडिस स्टेंस 2004 में पद्मश्री से सम्मानित हुईं। 2019 में ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑस्ट्रेलिया' दिया। वह आज भी ओडिशा में कुष्ठ रोगियों की सेवा करती हैं। मनोहरपुर में अब शांति है। चर्च दोबारा बना। लेकिन उस रात के निशान मिटे नहीं। गांव के युवा सरपंच बिरसा हेम्ब्रम कहते हैं, "हम आगे बढ़ गए। पर इतिहास नहीं भूल सकते। नफरत की आग सब जलाती है — अपने भी, पराए भी।" समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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