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गुजरात पुलिस गूगल से पूछताछ करेगी, शुभेंदु ने अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए
16/9/2026, 12:08:06 am

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गुजरात पुलिस ने बम की धमकी वाले ईमेल मामले में गूगल इंडिया के अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी कर ली है। अहमदाबाद की एक अदालत को मिले धमकी भरे मेल के बाद पुलिस ने गूगल को नोटिस भेजा है। जांच दल यह पता लगाना चाहता है कि मेल किस आईपी एड्रेस से भेजा गया और क्या गूगल के पास भेजने वाले की पहचान से जुड़ा कोई डेटा मौजूद है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गूगल से सहयोग न मिलने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की सियासत में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी पर फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुभेंदु ने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी की संपत्ति में बीते कुछ वर्षों में असामान्य वृद्धि हुई है। उन्होंने स्कूल भर्ती घोटाले और कट मनी वसूली में सीधे अभिषेक की भूमिका होने का आरोप दोहराया। शुभेंदु ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के पास पर्याप्त सबूत हैं और जल्द ही बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताकर खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डरा रही है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर सबूत हैं तो अदालत में पेश करें, मीडिया में बयानबाजी न करें।
पुलिस ने बताया कि धमकी भरा ईमेल 12 सितंबर को अदालत के आधिकारिक पते पर आया था। इसमें अदालत परिसर में विस्फोटक रखने की बात कही गई थी। इसके बाद अदालत की सुरक्षा बढ़ा दी गई और साइबर सेल को जांच सौंपी गई। गूगल इंडिया को भेजे गए नोटिस में आईपी लॉग, ईमेल हेडर और यूजर अकाउंट डिटेल मांगे गए हैं।
गूगल ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि वे कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे और आवश्यक जानकारी साझा करेंगे। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इसी तरह की धमकियों को रोका जा सके।
बंगाल में शुभेंदु के आरोपों के बाद भाजपा ने भी बयान जारी कर कहा कि केंद्रीय एजेंसियां निष्पक्ष जांच कर रही हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया कि तृणमूल के नेता भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और जनता को सच जानने का अधिकार है। तृणमूल ने इसे चुनावी स्टंट बताया और कहा कि विपक्ष केवल मीडिया ट्रायल कर रहा है।
गुजरात वाला मामला साइबर सुरक्षा और बड़ी टेक कंपनियों की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ सकता है। वहीं बंगाल का घटनाक्रम 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तापमान बढ़ा रहा है। दोनों ही मामलों में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर देश की नजर टिकी है।
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
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