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हाथरस कांड के छह साल: दलित परिवार अब भी सुरक्षा घेरे में, इंसाफ की राह अब भी लंबी

14/9/2026, 7:19:36 am
हाथरस कांड के छह साल: दलित परिवार अब भी सुरक्षा घेरे में, इंसाफ की राह अब भी लंबी
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उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 14 सितंबर 2020 को एक 19 वर्षीय दलित युवती के साथ हुई दरिंदगी ने पूरे देश को झकझोर दिया था। छह साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़िता का परिवार आज भी सामान्य जिंदगी नहीं जी पा रहा। परिवार के चारों ओर हर वक्त पुलिस का पहरा रहता है। घर के बाहर सशस्त्र जवान तैनात हैं, छत पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, और हर आने-जाने वाले पर नजर रखी जाती है। परिवार के मुखिया का कहना है कि सुरक्षा मिलना राहत की बात है, लेकिन यह आजादी नहीं है। "हम अपने ही घर में क़ैद होकर रह गए हैं," वे बताते हैं। "बच्चे खुलकर खेल नहीं सकते, रिश्तेदार आने से डरते हैं।" मामले में चार अभियुक्तों को निचली अदालत ने दोषी ठहराया था। दो को मौत की सजा और दो को उम्रकैद सुनाई गई। मगर ऊपरी अदालत में अपील लंबित है। परिवार का आरोप है कि गवाहों पर दबाव डाला जा रहा है और केस को कमजोर करने की कोशिशें जारी हैं। परिवार की मुख्य मांगें स्पष्ट हैं: सभी दोषियों को फांसी की सजा बरकरार रहे, मुकदमे की सुनवाई तेज हो, और उन्हें स्थायी रूप से हाथरस से बाहर सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए। वे यह भी चाहते हैं कि मामले की निगरानी सुप्रीम कोर्ट करे। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा इंतजाम पूरे हैं और परिवार को हर मुमकिन मदद दी जा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत अलग नजर आती है। परिवार का कहना है कि आर्थिक मदद के नाम पर मिली रकम खर्च हो चुकी है, और रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं है। इस मामले ने दलित उत्पीड़न, पुलिसिया लापरवाही और न्याय व्यवस्था की सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। छह साल बाद भी उन सवालों के जवाब अधूरे हैं। परिवार का संघर्ष सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उन तमाम पीड़ितों के लिए है जिनकी आवाज दबा दी जाती है।
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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