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भारत के हुनर की बढ़ती मांग: तीन लाख भारतीयों को मिलेगी नौकरी, जापान की अर्थव्यवस्था सुधरेगी

27/8/2026, 11:36:05 pm
भारत के हुनर की बढ़ती मांग: तीन लाख भारतीयों को मिलेगी नौकरी, जापान की अर्थव्यवस्था सुधरेगी
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भारत के कुशल श्रमिकोँ की मांग दिन-ब-दिन बढ़ रही है, विशेष रूप से उन देशों में जहाँ उम्रदराज आबादी तेज़ी से बढ़ रही है और स्थानीय श्रम बल कम पड़ रहा है। जापान, जो दुनिया की सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, इस समस्या से जूझ रहा है। इसके समाधान के लिए दोनों देशों ने श्रमिक आदान-प्रदान और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया टोक्यो दौरे के दौरान यह समझौता सामने आया। उन्होंने जापानी उद्योगपतियों और सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक में बताया कि भारतीय प्रतिभा को जापान की विभिन्न क्षेत्रों में नियोजित किया जा सकेगा। इस पहल का लक्ष्य तीन लाख भारतीय कामगारों को अगले दो वर्षों में रोजगार प्रदान करना है। इन नौकरियों का वितरण विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। जापान की कंपनियों ने भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों की क्षमता को पहचाना है, जबकि स्वास्थ्य और देखभाल क्षेत्र में बुजुर्ग आबादी की देखभाल के लिए प्रशिक्षित नर्स और देखभालकर्ता की आवश्यकता है। इसके अलावा, भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रशिक्षण को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। जापान की जनसांख्यिकीय चुनौती स्पष्ट है: 65 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों का अनुपात लगातार बढ़ रहा है, जिससे पेंशन प्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं पर भार बढ़ रहा है। युवा श्रमिकों की कमी को दूर करने के लिए विदेशी श्रमिकों पर निर्भरता बढ़ाना अनिवार्य बन गया है, और भारत दुनिया का सबसे बड़ा युवा श्रमिक पूल है। इस समझौते के तहत भारत सरकार भी अपने कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करेगी। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) और अन्य पहलों के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण मोड्यूल तैयार किए जाएंगे, जो जापानी कार्य वातावरण, भाषा और सुरक्षा मानकों के अनुरूप होंगे। प्रशिक्षण पूरा करने वाले उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र दिए जाएंगे, जिससे उनके रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कार्यरत भारतीय श्रमिकों को जापान में प्रतिस्पर्धी वेतन मिलेगा, साथ ही सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। इससे उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी और remittances के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। साथ ही, जापान में काम करने का अनुभव हासिल करने वाले पेशेवर वापस भारत लौटकर अपने zdobyтых कौशल को स्थानीय उद्योगों में लागू कर सकेंगे। समाप्त में, भारत-जापान इस श्रमिक सहयोग से दोनों देशों को लाभ होगा: जापान को आवश्यक श्रम बल मिलेगा, जबकि भारत को अपने युवाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय रोजगार के नए मार्ग खुलेंगे। यदि इस समझौते को ठीक से लागू किया गया तो यह द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व
समाचार स्रोत: अमर उजाला — विश्व

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