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भारत

सिंधु जल संधि: भारत ने मध्यस्थता अदालत का फैसला ठुकराया

31/8/2026, 12:43:32 am
सिंधु जल संधि: भारत ने मध्यस्थता अदालत का फैसला ठुकराया
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भारत ने सिंधु जल संधि पर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के ताजा फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अदालत को संप्रभु मामलों में दखल देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों — रावी, ब्यास और सतलज — पर पूरा अधिकार मिला है। पश्चिमी नदियों — सिंधु, झेलम और चिनाब — का पानी पाकिस्तान को दिया गया है लेकिन भारत को उनके सीमित उपयोग का हक है। पिछले साल पाकिस्तान ने किशनगंगा और रावी नदियों पर बने बांधों को संधि का उल्लंघन बताते हुए हेग स्थित अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने अपने आदेश में भारत से कुछ निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने और तकनीकी समीक्षा के लिए समिति गठित करने को कहा था। भारत ने इस आदेश को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि संधि की व्याख्या केवल दोनों देशों की सहमति से हो सकती है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत संधि के प्रावधानों का पालन करेगा लेकिन अपनी सुरक्षा और विकास की जरूरतों को भी ध्यान में रखेगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जल सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है और किसी बाहरी निकाय को इसमें हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने दोहराया कि विवाद समाधान के लिए संधि में द्विपक्षीय आयोग का प्रावधान है न कि एकपक्षीय अदालत का। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टकराव से क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है और दोनों पक्षों को बातचीत से मसला सुलझाने की सलाह दी गई है। पाकिस्तान ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह संधि की भावना के अनुरूप है। जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि भारत अपनी मौजूदा परियोजनाओं को जारी रखेगा और नई परियोजनाओं की समीक्षा संधि के प्रावधानों के अनुसार होगी। मंत्रालय ने यह भी कहा कि किसी भी नई संरचना की मंजूरी से पहले तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। फिलहाल भारत ने अदालत के फैसले को लागू नहीं करने का निर्णय लिया है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना पक्ष रखेगा। समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत
समाचार स्रोत: अमर उजाला — भारत

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