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इंटरमिटेंट फास्टिंग: फायदे या नुकसान? नई रिसर्च ने चौंकाया

17/8/2026, 1:39:12 am
इंटरमिटेंट फास्टिंग: फायदे या नुकसान? नई रिसर्च ने चौंकाया
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इंटरमिटेंट फास्टिंग आजकल वजन घटाने का सबसे लोकप्रिय तरीका बन गया है। फिल्मी सितारों से लेकर आम लोग तक इसे अपना रहे हैं। लेकिन एक नई रिसर्च ने इस ट्रेंड पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग रोजाना 8 घंटे से कम समय में खाना खाते हैं, उनमें दिल की बीमारी से मौत का खतरा 91 प्रतिशत तक ज्यादा होता है। यह अध्ययन 20,000 से ज्यादा वयस्कों पर किया गया था। रिसर्चर्स ने पाया कि 16:8 पैटर्न यानी 16 घंटे उपवास और 8 घंटे खाने का तरीका अपनाने वालों में कार्डियोवैस्कुलर मौतों का जोखिम सबसे अधिक था। हालांकि, शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया कि यह अध्ययन केवल संबंध दिखाता है, सीधा कारण नहीं। भारत में भी इंटरमिटेंट फास्टिंग तेजी से फैली है। मुंबई की डायटीशियन पूजा मखीजा कहती हैं, "हर शरीर अलग होता है। डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या थायराइड के मरीजों के लिए यह खतरनाक हो सकता है।" एम्स दिल्ली के डॉ. निखिल टंडन का मानना है कि लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ता है, जो दिल पर दबाव डालता है। उन्होंने सलाह दी कि वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम ही बेहतर विकल्प हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी डाइट प्लान शुरू करने से पहले अपनी मेडिकल हिस्ट्री जरूर जांच लें। ट्रेंड के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ न करें। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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