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हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: ईरान-अमेरिका तनाव के 5 कारण, दुनिया पर मंडराता खतरा

17/5/2026, 7:34:15 am
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य: ईरान-अमेरिका तनाव के 5 कारण, दुनिया पर मंडराता खतरा
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। यह टकराव सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व की नाजुक शांति पर पड़ रहा है। इस विवाद की जड़ें काफी गहरी हैं और ये हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्गों में से एक है, से लेकर 'एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस' तक फैली हुई हैं। इस गतिरोध के पीछे कई मुख्य मुद्दे हैं जिन पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत अटकी हुई है। पहला और सबसे अहम मुद्दा है ईरान का परमाणु कार्यक्रम। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश कर रहा है। जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्टें भी चिंताजनक रही हैं। दूसरा बड़ा मुद्दा है ईरान की क्षेत्रीय नीतियां और 'एक्सिस ऑफ़ रेज़िस्टेंस'। ईरान, इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में कई सशस्त्र समूहों का समर्थन करता है, जिन्हें अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगी जैसे इज़राइल और सऊदी अरब अपने लिए खतरा मानते हैं। अमेरिका इन समूहों को अस्थिरता फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराता है, जबकि ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रभाव क्षेत्र को बचाने का तरीका बताता है। तीसरा बिंदु है ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद, ईरान पर कई कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना और उसे बातचीत की मेज पर लाना है। हालांकि, ईरान इन प्रतिबंधों को अन्यायपूर्ण बताता है और उनका विरोध करता है। इससे ईरान की जनता पर भी गहरा असर पड़ा है, जिससे निराशा बढ़ी है। चौथा मुद्दा है हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौकायन की स्वतंत्रता। यह जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है और दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से होकर गुज़रता है। ईरान ने अतीत में इस जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। अमेरिका और उसके सहयोगी देश नौकायन की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसने तनाव को और बढ़ाया है। पांचवां और अंतिम मुद्दा है क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अविश्वास। मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच सीधा सैन्य टकराव तो नहीं हुआ है, लेकिन दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगियों देशों के जरिए परोक्ष रूप से विरोध में लगे रहे हैं। यह अविश्वास किसी भी छोटी सी घटना को बड़े संकट में बदल सकता है। खासकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील इलाके में, जहाजों पर हमले और बढ़ी हुई सैन्य उपस्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इन पांचों मुद्दों पर समाधान न मिलने के कारण ईरान और अमेरिका के बीच जारी गतिरोध के अच्छे परिणाम की उम्मीद करना मुश्किल हो जाता है। जब तक इन मूल कारणों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तब तक न सिर्फ दोनों देश, बल्कि पूरी दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुज़रती रहेगी। समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया
समाचार स्रोत: BBC हिंदी — दुनिया

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